‘तुगलकी फरमान वापस लो’ — ट्रांसपोर्ट समुदाय ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी

गाजियाबाद। दिल्ली-एनसीआर के ट्रांसपोर्ट संगठनों की एक महत्वपूर्ण संयुक्त बैठक एवं प्रेस कॉन्फ्रेंस रविवार को नवयुग मार्केट स्थित उडुपी रेस्टोरेंट में आयोजित की गई। बैठक में सीएक्यूएम (वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग) और दिल्ली सरकार की नीतियों के खिलाफ ट्रांसपोर्ट समुदाय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। संगठनों ने 21, 22 और 23 मई 2026 को तीन दिवसीय सांकेतिक ‘चक्काजाम’ आंदोलन करने की घोषणा की।
ट्रांसपोर्ट प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार की नई नीतियां ट्रांसपोर्ट व्यवसाय को बर्बादी की ओर धकेल रही हैं। बैठक में पर्यावरण क्षति शुल्क (ईसीसी/एनजीटी टैक्स) में भारी वृद्धि, बीएस-4 कमर्शियल वाहनों के दिल्ली प्रवेश पर प्रस्तावित प्रतिबंध, वीएलटीडी एवं एटीएस फिटनेस सेंटरों की अनिवार्यता तथा बीएस-6 वाहनों पर भी ईसीसी शुल्क जारी रखने के फैसले का विरोध किया गया।
ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. हरीश सभरवाल, पूर्व अध्यक्ष कुलतरन अटवाल, महासचिव श्याम सुंदर और महासचिव नरेश ढींगरा ने कहा कि सरकार ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि फैसले वापस नहीं लिए गए तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
बैठक में उत्तर प्रदेश मोटर ट्रांसपोर्ट के मंडल अध्यक्ष कमलेश कुमार ‘कम्मों पंडित’ विशेष रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा गाजियाबाद ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र शर्मा, उपाध्यक्ष गौरव शर्मा, बस यूनियन अध्यक्ष तेजपाल त्यागी, सचिव अनूप बेरी, अध्यक्ष अजय पाठक, महासचिव विपिन सिंघल, महामंत्री अमित भारद्वाज सहित बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट व्यवसायी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ट्रांसपोर्ट संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार के ये फैसले केवल ट्रांसपोर्ट कारोबार ही नहीं बल्कि पूरे सप्लाई चेन सिस्टम को प्रभावित करेंगे। प्रतिनिधियों ने कहा, “हम सरकार की तानाशाही नीतियों के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। यह तीन दिवसीय चक्काजाम केवल शुरुआत है, जरूरत पड़ी तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।”
इस आंदोलन का नेतृत्व ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी), गाजियाबाद ट्रक ऑपरेटर एसोसिएशन तथा गाजियाबाद महानगर गुड्स ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा किया जाएगा।



