ट्रंप ने चार देशों को 81,000 करोड़ के हथियार सप्लाई करने की योजना बनाई, ये देश बनने जा रहे हैं ताकतवर

US arms sale 2026: पश्चिम एशिया में ईरान के साथ चल रहे भीषण संघर्ष की पृष्ठभूमि में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बेहद आक्रामक कदम उठाया है। अमेरिकी कांग्रेस की मंज़ूरी का इंतज़ार किए बिना, ट्रम्प प्रशासन ने इज़राइल सहित चार सहयोगी देशों को अत्याधुनिक हथियार बेचने की हरी झंडी दे दी है—जिनकी कीमत $8.6 बिलियन (एक चौंका देने वाली राशि ₹81,622 करोड़) है। अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने “आपातकालीन स्थिति” का हवाला देते हुए कांग्रेस की समीक्षा प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया है।

इस विशाल रक्षा सौदे में मुस्लिम देश को ज्यादा फायदा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस सौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। आम तौर पर, अमेरिका में किसी भी विदेशी देश को हथियार बेचने के लिए कांग्रेस की सहमति ज़रूरी होती है। हालाँकि, मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति को देखते हुए इस प्रक्रिया का पालन करना असंभव बताते हुए, प्रशासन ने अपनी विशेष कार्यकारी शक्तियों का इस्तेमाल किया है। हथियारों की यह आपूर्ति इज़राइल, कतर, कुवैत और UAE की सैन्य क्षमताओं को कई गुना बढ़ाने वाली है।

  • कतर: इसे $4.01 बिलियन का ‘पैट्रियट’ वायु और मिसाइल रक्षा प्रणाली मिलेगी, साथ ही $992.4 मिलियन मूल्य की सटीक-मार करने वाली हथियार प्रणाली भी मिलेगी।
  • कुवैत: इसे $2.5 बिलियन मूल्य की ‘एकीकृत युद्ध कमान प्रणाली’ (Integrated Battle Command System) प्रदान की जाएगी।
  • इज़राइल: इसे $992.4 मिलियन मूल्य के अत्याधुनिक हथियार मिलेंगे।
  • UAE: इसे $147.6 मिलियन मूल्य की हथियार प्रणालियों की आपूर्ति की जाएगी।

इन सभी हथियारों के निर्माण की ज़िम्मेदारी लॉकहीड मार्टिन और नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन जैसी रक्षा उद्योग की दिग्गज कंपनियों पर होगी।

टकराव की पृष्ठभूमि पर एक नजर

यह फ़ैसला ऐसे समय में आया है जब एक तरफ़ अमेरिका और इज़राइल, और दूसरी तरफ़ ईरान के बीच सीधा टकराव चल रहा है। 28 फरवरी को, अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर एक संयुक्त हमला किया, जिसका जवाब ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर दिया। अब तक, इस संघर्ष में हज़ारों बेगुनाह लोगों की जान जा चुकी है, और लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं।

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फैसले पर आलोचनाओं की बौछार

मानवाधिकार संगठनों ने ट्रंप के इस फैसले पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर की है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका, कुवैत, UAE और कतर में मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को नज़रअंदाज़ कर रहा है। हालाँकि, अमेरिका ने अपना यह रुख बरकरार रखा है कि “हम क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने सहयोगियों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

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