हिमंत बिस्वा असल में सत्ता बरकरार रख पाएँगे या गौरव गोगोई सियासी समीकरण बदल देंगे, जानें दोनों की कमजोरी और ताकत

assam chunav 2026: असम एक ऐसा राज्य जो अक्सर पूर्वोत्तर भारत की राजनीतिक दिशा तय करता है। यहां मौजूदा मुकाबला मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और कांग्रेस पार्टी के गौरव गोगोई के राजनीतिक अस्तित्व और भविष्य की लड़ाई है। राज्य में अपने दम पर सत्ता हासिल करना BJP के लिए अभी भी एक चुनौती बना हुआ है; पार्टी अभी जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है।

इस चुनाव में कई कारक निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं पहचान की राजनीति से लेकर ज़ुबीन गर्ग की मौत की चल रही जाँच जैसे भावनात्मक मुद्दों तक। BJP सुशासन, कल्याणकारी योजनाओं और ‘जाति, माटी, भेटी’ (समुदाय, ज़मीन और पहचान) पर केंद्रित अपनी मुख्य रणनीति के ज़रिए अपना दबदबा और मज़बूत करने की कोशिश कर रही है। दूसरी ओर कांग्रेस—नेतृत्व की एक नई पीढ़ी को आगे लाकर और गठबंधन बनाकर—सत्ता-विरोधी लहर और बदलते सामाजिक समीकरणों का फ़ायदा उठाकर खुद को फिर से स्थापित करने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस-प्रभुत्व वाले इस राज्य में BJP का असली उभार 2016 में शुरू हुआ, जब पार्टी ने कांग्रेस के 15 साल के शासन को सफलतापूर्वक समाप्त कर दिया। हालाँकि, 60 सीटें जीतने के बावजूद, BJP पूर्ण बहुमत के आँकड़े तक पहुँचने से पीछे रह गई। 2021 के चुनावों में भी यही रुझान देखने को मिला; उस मुकाबले में, BJP ने एक बार फिर 60 सीटें हासिल कीं। नतीजतन, बहुमत के लिए ज़रूरी 64 सीटों की सीमा को पार करने के लिए, पार्टी को अपने गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रहना पड़ा।

BJP की ताकतें

  • सरमा का प्रभावी नेतृत्व
  • ‘जाति, ज़मीन और पहचान’ का मुद्दा
  • मज़बूत संगठनात्मक ढाँचा; NDA गठबंधन
  • विकास, बुनियादी ढांचे और कल्याणकारी योजनाओं पर ज़ोर

कमज़ोरियाँ

  • सत्ता-विरोधी लहर (Anti-incumbency wave)
  • बेरोज़गारी और महंगाई के मुद्दे
  • कुछ क्षेत्रों में नाराज़गी

BJP के लिए अवसर पैदा करने वाले कारक

  • विपक्ष में बिखराव
  • अवैध घुसपैठ (सीमा पार से) का मुद्दा असरदार साबित होना
  • वोटरों का स्थिरता की ओर झुकाव

कांग्रेस की ताक़तें

  • गौरव गोगोई का नया नेतृत्व
  • अल्पसंख्यक समूहों और सामाजिक समीकरणों पर मज़बूत पकड़
  • विपक्षी गठबंधन को मज़बूत करने के प्रयास

कमज़ोरियाँ

  • कमज़ोर संगठनात्मक ढाँचा
  • अहम नेताओं का पार्टी छोड़कर जाना
  • लगातार चुनावी हार का इतिहास

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कांग्रेस के लिए अवसर पैदा करने वाले कारक

  • सत्ता-विरोधी लहर
  • युवा नेतृत्व से मिली नई ऊर्जा
  • गठबंधनों के ज़रिए वोटों का एकीकरण

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