शिखर से शून्य की ओर AAP? एक-एक कर साथ छोड़ रहे दिग्गज, अब राघव चड्ढा की बारी

राघव, तुम डर गए हो। मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हो। जो डर गया वो, देश के लिए क्या लड़ेगा? आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने यह बयान देकर युवा सांसद राघव चड्ढा पर निशाना साधा है। राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा के खिलाफ विरोधियों की बजाए अपनों ने मोर्चा खोल दिया है। दिल्ली के सियासी गलियारों में वह चर्चाओं के केंद्र में हैं। ‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना।’

राघव चड्ढा ने वीडियो जारी कर आप नेताओं पर करारा पलटवार किया है। आम आदमी पार्टी (आप) और राघव के बीच बढ‍़ती तकरार अच्छे संकेत नहीं हैं। आप ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद की जिम्मेदारी सौंप रखी थी। उन्हें अचानक इस दायित्व से मुक्त कर पंजाब के नेता अशोक मित्तल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कुमार विश्वास और योगेंद्र यादव की राह पर राघव?

तेजी से बदलते घटनाक्रमों से साफ है कि आप और राघव चड्ढा के मध्य सब कुछ ठीक-ठाक नहीं चल रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या अब अगला नंबर राघव का है? क्या वह जल्द आप से किनारा करने के मूड में हैं? इसके पहले योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, आशुतोष, आशीष खेतान, शाजिया इल्मी, कपिल मिश्रा और मयंक गांधी जैसे नेताओं ने आप को अलविदा कर दिया था।

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने भी पार्टी से दूरी बना रखी है। राज्यसभा में राघव चड्ढा ने अक्सर जनहित से जुड़े मुद्दों को जोर-शोर एवं प्रभावी तरीके से उठाया है। आजकल उन्होंने निजी मोबाइल कंपनियों के खिलाफ आवाज उठा रखी है। मोबाइल में अट्ठाइस दिन के रिचार्ज प्लान पर उन्होंने सवाल खड़े किए थे। राघव का आरोप है कि कंपनियां पूरे माह का शुल्क लेती हैं, मगर रिचार्ज सिर्फ 28 दिनों का करती हैं।

इस प्रकार यह कंपनियां साल में 12 की बजाए 13 माह का रिचार्ज शुल्क वसूलती हैं। यह कतई उचित नहीं है। इसके अलावा उन्होंने एयरपोर्ट पर महंगे समोसे की बिक्री का मुद्दा भी उठाया था। सियासी गलियारों में राघव चड्ढा के जल्द भाजपा ज्वाइन करने की चर्चाएं भी शुरू हो चुकी हैं। इन चर्चाओं में कितना दम है, यह निकट भविष्य में मालूम पड़ जाएगा। भारत की राजनीति में कुछ साल पहले आम आदमी पार्टी (आप) का उदय होने पर खलबली मच गई थी। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में पार्टी का गठन किया गया।

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केजरीवाल ने शुरुआत में जिस प्रकार की राजनीति की, उसने युवाओं को काफी प्रभावित किया था। युवाओं को केजरीवाल के भीतर बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘नायक’ के किरदार अनिल कपूर नजर आने लगे थे। दिल्ली विधानसभा चुनाव में आप ने जिस धमाकेदार तरीके से जीत दर्ज की, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी हैरान कर दिया था। केजरीवाल की लोकप्रियता की आंधी में भाजपा और कांग्रेस जैसे दल मानो उड़ गए थे। समय के साथ आप बेशक मजबूत होती गई, मगर पार्टी से समय-समय पर दिग्गज नेताओं के बाहर होने का सिलसिला जारी रहा।

शिखर से शून्य की ओर AAP

दिल्ली के पिछले विधानसभा चुनाव में आप को करारी हार का सामना करना पड़ा। फिलहाल पंजाब में आप की सरकार है। इस बीच शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। जानकारों का मानना है कि यह पार्टी जिस तेजी से शिखर पर पहुंची थी, उसी तेजी से नीचे भी आ गई है। यदि राघव चड्ढा भविष्य में आप का साथ छोड़ दें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी।

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