सीमा पर हर मिनट बरसेंगी 700 गोलियां, सेना को 2,000 ‘प्रहार’ मशीन गनों की पहली खेप मिली

Prahaar Weapon: अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने सीमाओं पर भारतीय सेना की युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। 28 मार्च को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आयोजित एक विशेष समारोह के दौरान दो हजार ‘प्रहार’ लाइट मशीन गन की पहली खेप आधिकारिक तौर पर भारतीय सेना को सौंप दी गई।
‘प्रहार’ मशीन गन की क्या ताकत है?
ग्वालियर में ‘स्मॉल आर्म्स कॉम्प्लेक्स’ में निर्मित, ये 7.62mm कैलिबर के हथियार कई खासियतों से लैस हैं, जिनका विवरण नीचे दिया गया है। यह मशीन गन प्रति मिनट 700 राउंड की तेज़ बौछार करने में सक्षम है। इसकी प्रभावी मारक क्षमता एक हजार मीटर (1 किमी) की दूरी तक सटीक निशाना लगाने की सुविधा देती है। इसका वज़न मात्र 8 किलोग्राम है और लंबाई 1,100 mm है, जिससे इसे ले जाना और संभालना बेहद आसान हो जाता है।
LAC और LoC पर तैनात की जाएंगी
ये आधुनिक हथियार मुख्य रूप से भारत-चीन और भारत-पाकिस्तान सीमाओं पर तैनात करने के लिए बनाए गए हैं। ऐसी उम्मीद है कि ये मशीन गन ऊबड़-खाबड़, पहाड़ी इलाकों में गश्त करने वाले सैनिकों के लिए विशेष रूप से प्रभावी साबित होंगी।
रक्षा क्षेत्र में बढ़ा भारत का कद
इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्रालय के महानिदेशक ए. अंबरासु और अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के CEO आशीष राजवंशी शामिल हुए। इस पहल को रक्षा क्षेत्र में भारत की ‘आत्मनिर्भरता’ हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी की बदौलत, भारतीय सेना के पास अब देश के भीतर ही निर्मित विश्व स्तरीय हथियार उपलब्ध हैं।



