6 सूत्रीय मांगों के साथ मऊ में गरजा सर्वदलीय मंच

मऊ। आज दिनांक 18 मार्च 2026 को सर्वदलीय मंच के आवाहन पर एक दिवसीय धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का नेतृत्व मंच के संयोजक ओमप्रकाश बागी ने किया। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों और समाज के लोगों की मौजूदगी रही। इस दौरान महामहिम महोदया का ध्यान आकर्षित करते हुए 6 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया।
धरना को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आजादी के 76 साल बाद भी देश में जाति और धर्म के नाम पर शोषण और अत्याचार जारी है। हालांकि पहले भी संतों, गुरुओं और महापुरुषों ने समाज में बदलाव के लिए प्रयास किए, जिससे शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी और सभी वर्गों के लोग आगे बढ़े। लेकिन आज भी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग को कई स्तरों पर भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।
वक्ताओं ने न्यायपालिका और शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि उच्च न्यायालयों में कोलिजियम सिस्टम के कारण सीमित परिवारों का दबदबा बना हुआ है, जिससे समान अवसर प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर और कुलपति जैसे पदों पर एकतरफा भर्तियों का आरोप भी लगाया गया।
धरना में 69000 शिक्षक भर्ती, नीट परीक्षा में पेपर लीक और अन्य मुद्दों को उठाते हुए न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी चिंता जताई गई। साथ ही रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों का जिक्र करते हुए शिक्षा संस्थानों में हो रहे भेदभाव और उत्पीड़न को गंभीर समस्या बताया गया।
प्रदर्शनकारियों ने किसानों और बुनकरों की समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जहां किसान लंबे समय से संकट झेल रहे हैं, वहीं बुनकरों को भी बिजली बिल और अन्य समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी देखने को मिली।
धरना के अंत में मंच की ओर से 6 प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें न्यू यूजीसी कानून को लागू करने, घोसी चीनी मिल को पुनः चालू कर नियमित पेराई कराने, बुनकरों के लूम का बिजली बिल माफ करने, स्मार्ट मीटर व्यवस्था खत्म करने, बीबीपुर बेलौली बांध पर अवैध बालू खनन रोकने और वाराणसी-गोरखपुर हाईवे पर आवश्यक स्थानों पर ओवरब्रिज व अंडरपास बनाने की मांग शामिल है।
अंत में प्रदर्शनकारियों ने उम्मीद जताई कि सरकार इन मांगों पर गंभीरता से विचार कर जल्द उचित कदम उठाएगी।



