शिक्षिका के बेटे ने पास की सिविल सेवा परीक्षा, पाई 802वीं रैंक
संघर्षों से भरी हैं शुभम गौतम की कहानी, छठवें प्रसास में पाई सफलता

रायबरेली। है कौन विघ्न ऐसा जग में, टिक सके आदमी के मग में?
ख़म ठोंक ठेलता है जब नर पर्वत के जाते पाव उखड़,
मानव जब जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।
संघर्षों की दास्तां को बयां करती सफलता की कहानी पर लिखी गई राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर कविता की ये लाइनें यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में सफलता अर्जित करने वाले शुभम गौतम पर बिल्कुल सटीक बैठती है।
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने एक नहीं बल्कि तीन-तीन बार मेंस लिखें और दो बार इंटरव्यू की दहलीज पर पहुंचें, लेकिन सफलता नहीं अर्जित हुई। एक के बाद एक लगातार आ रही निराशा के बाद हतोत्साहित हो चुके शुभम पांचवें अटेम्प्ट में प्री परीक्षा नहीं पास कर पाएं। तब मिला परिवार का साथ और फिर से तैयारी शुरू की और अपने छठवें अटेम्प्ट में पास कर ली भारत की सबसे कठिन परीक्षा में शामिल सिविल सेवा परीक्षा।
शहर के इंदिरा नगर मोहल्ले के वैभव विहार मोहल्ला निवासी शुभम गौतम ने अपने छठें अटेम्प्ट में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा में 802वीं रैंक हासिल करके अपने परिवार और माता पिता का मान बढ़ाया है।
मूलरूप से लालगंज कस्बे के चमनगंज मोहल्ला निवासी शुभम गौतम के पिता सुरेश गौतम भारतीय जीवन बीमा निगम में प्रशासनिक अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं तो वहीं माता मालती देवी शिक्षिका है जो कि लालगंज कस्बे के उच्च प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत है। चाचा सुनील गौतम डलमऊ ब्लॉक में ग्राम विकास अधिकारी है। शुभम की बहन अंजलि गौतम भी अपने भाई की तरह ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही है।
शुभम गौतम ने कठिन परिश्रम के साथ पढ़ाई की और यह मुकाम हासिल किया। उन्होंने सेल्फ पढ़ाई के साथ ही कुछ समय दिल्ली में भी कोचिंग ली थी। इसके बाद में दिल्ली में ही रहकर पढ़ाई की। उन्हें यह सफलता अपने छठवें प्रयास में मिली है। शुभम ने पहली बार वर्ष 2020 में सिविल सेवा की प्री परीक्षा दी थी, लेकिन पहले अटेम्प्ट में प्री परीक्षा भी नहीं पास कर पाएं। इसके बाद हर वर्ष वे सिविल सेवा परीक्षा देते रहे।
शुभम ने बताया कि दूसरे प्रयास में मेंस तक पहुंचा, लेकिन साक्षात्कार का मौका नहीं मिला। इसके बाद तीसरे और चौथे अटेम्प्ट में साक्षात्कार देने का मौका मिला, लेकिन अंतिम चयन सूची में नाम नहीं था। उन्होंने बताया कि एक के बाद एक असफलता मिलने के बाद मैं पूरी तरह से टूट चूका था। पांचवें प्रयास में मैं प्री परीक्षा भी नहीं पास कर पाया। इस दौरान मेरे माता-पिता ने मेरा हौसला बढ़ाया और फिर से मैंने अच्छे से तैयारी शुरू की और छठवें प्रयास में एआईआर 802 रैंक हासिल की है। उन्होंने बताया कि पढ़ाई का सफर अभी आगे भी जारी रहेगा।



