भारत के पास कितने दिनों का कच्चा तेल रिजर्व है, जानें युद्ध बढ़ा तो क्या होगा

ईरान के विरुद्ध इजरायल और US की शुरू की गई जंग लंबी होती दिख रही है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की US-इजरायल हत्या ने इस लड़ाई को और बढ़ा दिया है। क्योंकि ईरान के इजरायल और US पर हमले बढ़ गए हैं। इसके अलावा, ईरान ने क्रूड ऑयल और गैस (नेचुरल गैस) ट्रेड रूट को बंद करने का ऐलान किया है। भारत इसी रूट से ईरान और खाड़ी देशों से इंपोर्ट करता है।
भारत होर्मुज स्ट्रेट रूट के जरिए बड़ी मात्रा में तेल इंपोर्ट करता है। भारत ईरान, सऊदी अरब, यूनाइटेड अरब अमीरात, कतर और कुवैत से क्रूड ऑयल और गैस इंपोर्ट करता है। जनवरी में भारत ने अपने कुल तेल इंपोर्ट का 55 परसेंट मिडिल ईस्ट के देशों से इंपोर्ट किया।
भारत के पास कितना तेल है?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने युद्ध जैसे हालात या ग्लोबल संकट से निपटने के लिए अंडरग्राउंड वेयरहाउस में तेल स्टोर किया है। भारत के तेल रिजर्व तीन शहरों में हैं। ये तेल रिजर्व विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में हैं। इनमें करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन कच्चा तेल स्टोर करने की कैपेसिटी है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने फरवरी में कहा था कि अगर भारत अलग-अलग जगहों पर स्टोर किए गए सारे तेल को मिला दे, तो उसके पास 74 दिनों के लिए काफी तेल है।
रोज़ाना 1.5 करोड़ बैरल का ट्रांसपोर्टेशन
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से रोज़ाना 1.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल ट्रांसपोर्ट किया जाता है। कुछ समुद्री चैनलों के ज़रिए पाइपलाइन से भी तेल ट्रांसपोर्ट किया जाता है। हालांकि, अगर होर्मुज स्ट्रेट बंद हो जाता है, तो 1 करोड़ बैरल तक तेल पर असर पड़ेगा।
भारत के लिए ये झटका क्यों है?
भारत जितने कुल कच्चे तेल का इंपोर्ट करता है, उसमें से 50 परसेंट तेल, यानी हर दिन 25 से 27 बैरल, होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए इंपोर्ट किया जाता है। भारत मुख्य रूप से इराक, सऊदी अरब, UAE और कुवैत जैसे देशों से तेल इंपोर्ट करता है। तेल के अलावा, घरेलू इस्तेमाल के लिए LPG गैस, LNG इसी रास्ते से इंपोर्ट की जाती है।
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एक्सपर्ट्स के मुताबिक, क्रूड ऑयल के मुकाबले भारत के लिए नैचुरल गैस सप्लाई का संकट पैदा हो सकता है। भारत अपनी कुल LPG गैस ज़रूरत का 80 से 85 परसेंट इम्पोर्ट करता है। ज़्यादातर गैस खाड़ी में होर्मुज स्ट्रेट के ज़रिए इम्पोर्ट की जाती है। भारत के पास नैचुरल गैस स्टोर करने के लिए इतनी बड़ी कैपेसिटी वाला वेयरहाउस नहीं है।


