क्या गाजियाबाद की पॉश कॉलोनी कविनगर हो जाएगी जाम और प्रदूषण का शिकार

गाजियाबाद शहर की पॉश कॉलोनी कविनगर में नगर निगम द्वारा ‘वेंडिंग जोन’ बनाने की प्लानिंग का पुरजोर विरोध सामने आया है। नागरिकों ने सड़क किनारे पोस्टर-बैनर लगाकर अपनी नाराजगी का इजहार कर दिया है। प्रस्तावित वेंडिंग जोन को लेकर रेजीडेंट्स की चिंता जायज है। कॉलोनी में यातायात जाम व वायु प्रदूषण की समस्या गहराने के अलावा ग्रीन बेल्ट को नुकसान पहुंचेगा। इसके अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होने की भी संभावना है। सड़क किनारे ग्रीन बेल्ट पर दुकानों का संचालन होने से हरियाली नष्ट हो जाएगी।
शहर की पॉश कॉलोनियों में सबसे पहले राजनगर और कविनगर का नाम आता है। जीडीए द्वारा विकसित इन कॉलोनियों में आशियाना बनाना कम से कम मध्यम वर्गीय परिवार के लिए कतई संभव नहीं है। वहां प्रॉपर्टी के दाम काफी अधिक हैं। राजनगर-कविनगर को धनाढ्य वर्ग की कॉलोनी माना जाता है। कविनगर में कुल चौदह ब्लॉक हैं।
क्यों नाराज हैं नागरिक
जहां बड़ी संख्या में आवासीय एवं कमर्शियल प्रॉपर्टी हैं। सी ब्लॉक में पहले से बाजार लगता है। बाजार के कारण वहां जाम की समस्या रोजमर्रा की बात है। ऐसे में वेंडिंग जोन की सुगबुगाहट ने नागरिकों को गुस्से से भर दिया है।
भविष्य की परेशानियों को ध्यान में रखकर उन्हें विरोध में आवाज उठानी पड़ी है। नगर निगम यदि पीछे नहीं हटता तो मामला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) और सिविल कोर्ट तक पहुंच सकता है। वेंडिंग जोन को लेकर नगर निगम की मंशा गलत नहीं है। इसके जरिए जरूरतमंदों को रोजगार करने के लिए निश्चित स्थान मिल जाएगा, मगर सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि वेंडिंग जोन के नाम पर हरियाली के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
फिर कविनगर में भूखंड खरीदने के लिए आवंटियों ने प्राइम लोकेशन चार्ज अलग से दिए हैं। वेंडिंग जोन की वजह से भवन स्वामियों की शांति एवं निजता में भी खलल पड़ेगी। कविनगर से इतर जस्सीपुरा के सामने गंदा नाला चौपला (मंदिर) पर संडे मार्केट को लेकर भी खासा विवाद चल रहा है। इस संकरे मार्ग पर साप्ताहिक बाजार लगने से आसपास के भवन स्वामी और दुकानदार परेशान हैं।
पुलिस जांच में क्या मिला
यही नहीं संडे के दिन बाजार में खरीदारों की भीड़ उमड़ने पर जीटी रोड पर भी यातायात बाधित रहता है। शहर में साप्ताहिक बाजारों को लेकर हमेशा दो गुट रहे हैं। नवयुग मार्केट में लंबे समय तक साप्ताहिक बाजार लगता रहा था। बाद में बड़ी मुश्किल से बाजार को बंद कराया गया। विभिन्न कॉलोनियों में वैध-अवैध तरीके से वीकली मार्केट चल रही हैं। यातायात पर इसका सबसे बुरा असर पड़ता है। वीकली मार्केट में दुकानदारों से जबरन अवैध वसूली की शिकायतें भी मिलती रहती हैं। कमिश्नरेट पुलिस ने काफी समय पहले अवैध बाजारों की सूची तैयार कराई थी।
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पुलिस की छानबीन में कई ऐसे व्यक्तियों के नाम सामने आए थे, जो इन बाजारों से मोटी कमाई कर रहे थे। फिलहाल कविनगर का मामला ताजा है। नगर निगम ने अगर धींगामुश्ती का परिचय दिया तो उसे जन विरोध का सामना करना पड़ेगा। इससे क्षेत्र में शांति व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
अलबत्ता निगम अधिकारियों को संबंधित पार्षदों व आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों से वार्ता कर संभावित समस्याओं पर विचार करने की जरूरत है। शहर में अतिक्रमण के कारण अलग-अलग स्थानों पर ग्रीन बेल्ट उजड़ चुकी है। इस संबंध में शिकायत करने पर त्वरित कार्रवाई का अभाव रहता है। शहर को खूबसूरत, अतिक्रमण मुक्त, साफ-सुथरा, हरा-भरा, जाम फ्री और प्रदूषण मुक्त बनाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।



