अमेरिका पर विश्वास मतलब पांव पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर, वजह जानें
us relations with other countries: जीवन में भरोसा बड़ी महत्वपूर्ण चीज मानी जाती है। नजदीक और दूर के रिश्ते अक्सर भरोसे पर चलते हैं। दो देशों के संबंधों की मजबूती में भी भरोसा अहम रोल निभाता है। देश यदि अमेरिका जैसा हो तो आंख मूंदकर विश्वास करना मतलब अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने के बराबर है। अमेरिकी प्रशासन की वर्तमान नीतियों ने दोस्तों को भी मुश्किल में डाल रखा है। वाशिंगटन ने ताजा झटका पाकिस्तान को दिया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर पिछले काफी समय से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आगे नतमस्तक हैं। अमेरिका संग रिश्ते बेहतर करने की खातिर शरीफ और मुनीर अपना स्वाभिमान व आत्मसम्मान तक खूंटी पर टांग चुके हैं। इसके बावजूद अमेरिका उन्हें ठेंगा दिखाने से बाज नहीं आया है।
अमेरिका की ट्रैवल एडवाइजरी से पाकिस्तान की परेशानियां बढ़ीं
ताजा मामला अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा अपनी ट्रैवल एडवाइजरी को अपडेट करने से जुड़ा है। इसमें पाकिस्तान जाने के इच्छुक अमेरिकी नागरिकों से यात्रा प्लान करने से पहले दो बार सोचने की सलाह दी गई है।
अमेरिका ने ट्रैवल एडवाइजरी में पाकिस्तान में अपराध, नागरिक अशांति, आतंकवाद और अपहरण का खतरा बताया है। एडवाइजरी में पाकिस्तान को लेवल तीन में जगह दी गई है, जो उच्च खतरे की श्रेणी है। यह कैटेगरी ऐसे देशों या क्षेत्रों के बारे में जाती है, जहां बिना किसी चेतावनी के आतंकवादी हमले हो सकते हैं। अमेरिका की ट्रैवल एडवाइजरी ने पाकिस्तान सरकार की परेशानी और बढ़ा दी है। सोशल मीडिया पर यह मसला चर्चाओं में है।
सोशल मीडिया पर पाकिस्तान के नागरिक अपने पीएम और सेना प्रमुख से सवाल पूछ रहे हैं। कुछ यूजर्स का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप की इतनी खुशामद के बाद भी शहबाज शरीफ और असीम मुनीर पाकिस्तान की इज्जत नहीं बचा पा रहे हैं। इंटरनेट मीडिया पर शरीफ-मुनीर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए हैं। अमेरिका-पाकिस्तान की जुगलबंदी ने न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया को स्तब्ध कर रखा है।
पाकिस्तान में कानून व्यवस्था की हालत खराब
ऑपरेशन सिंदूर के बाद से भारत-पाकिस्तान के रिश्ते और ज्यादा खराब हो चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने भारत-पाक के बीच संघर्ष विराम कराया था। हालांकि नई दिल्ली ने ट्रंप के दावे को हर बार खारिज किया है। जबकि पाकिस्तान सरकार ट्रंप की बात से सहमत है। वैसे अमेरिका के विदेश विभाग की ट्रैवल एडवाइजरी ने पाकिस्तान की आंतरिक हालत को एक बार फिर उजागर किया है। वहां कानून व्यवस्था की हालत खराब है। आतंकवादियों पर काबू पाने में पुलिस-प्रशासन और सेना नाकाम है।
कट्टरपंथी संगठनों ने सरकार की नाक में नकेल डाल रखी है। कुख्यात आतंकी हाफिज सईद और मौलाना मसूद अजहर के गुर्गे समय-समय पर सार्वजनिक रूप से भारत विरोधी बयानबाजी करते रहते हैं। बलूचिस्तान और केपी प्रांत में परिस्थितियां चिंताजनक हैं।
अमेरिका में बुरा हाल, ट्रंप पर जनता का भरोसा क्यों टूटा रहा
बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाके जब-तब पाकिस्तान आर्मी को गहरे घाव देते रहते हैं। पाकिस्तान के किस प्रांत में कब बम धमाका हो जाए, यह कोई नहीं जानता। इसके मद्देनजर अमेरिका द्वारा अपने नागरिकों को पाकिस्तान की यात्रा पर जाने से परहेज करने की सलाह देना गलत भी नहीं है। दरअसल पाकिस्तान को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ रहा है।
आतंकवाद और कट्टरपंथी संगठनों पर शिकंजा कसने की बजाए उन्हें बढ़ावा देने की सेना की नीति ने देश को गर्त में डाल दिया है। इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार चरम पर है।



