धनगर जाति प्रमाण-पत्र को लेकर मऊ में बढ़ा विवाद
शासनादेश व न्यायालय के आदेश के बावजूद नहीं मिल रहा अनुसूचित जाति का लाभ

मऊ। संविधान के अनुच्छेद 341 एवं संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश 1950 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की अनुसूचित जातियों की सूची में शामिल धनगर जाति (क्रम संख्या–27) को प्रमाण-पत्र जारी न होने से जनपद मऊ में असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो गई है।
मा० उच्च न्यायालय द्वारा ऑल इंडिया धनगर समाज महासंघ व अन्य मामले में 14 मार्च 2012 को दिए गए निर्णय में स्पष्ट किया गया था कि गड़ेरिया जाति की दो उपजातियाँ – धनगर एवं निखर हैं तथा दोनों के बीच रोटी-बेटी एवं हुक्का-पानी के सामाजिक संबंध नहीं हैं।
इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्पष्टीकरण आदेश संख्या-207 सीएम/26/03/2018 जारी कर यह व्यवस्था की गई कि स्थलीय जांच के आधार पर धनगर उपजाति के व्यक्तियों को अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र निर्गत किया जाए।
इस संबंध में जिलाधिकारी मऊ द्वारा भी दिनांक 06 फरवरी 2019, पत्रांक 801 दिनांक 12 जनवरी 2021, तथा पत्रांक 1611 दिनांक 25 नवंबर 2023 को स्पष्ट आदेश जारी किए गए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर आदेशों का अनुपालन नहीं हो सका है।
धनगर समाज का आरोप है कि प्रमाण-पत्र न मिलने के कारण समाज के बच्चों की शिक्षा, छात्रवृत्ति एवं अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ बाधित हो रहा है, जिससे समाज के समुचित विकास में रुकावट आ रही है।
समाज की ओर से मांग की गई है कि जनपद के सभी उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक एवं लेखपाल को निर्देशित कर शासनादेश के अनुरूप जांच कराते हुए धनगर जाति के प्रमाण-पत्र सुगमता से जारी किए जाएँ।
धनगर समाज ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र ही शासनादेश का कड़ाई से पालन नहीं हुआ, तो समाज को सड़क पर उतरकर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।



