ब्रह्मपुत्र के किनारे खून की बाढ़; 200 से ज़्यादा हमले, बांग्लादेश के इस ज़िले में हिंदुओं का वजूद खतरे में

शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के बाद वहां भड़की हिंसा अब भयानक रूप ले चुकी है। बांग्लादेश का खास तौर पर मैमनसिंह जिला आजकल हिंदू माइनॉरिटी के लिए ‘मौत का जाल’ बनता जा रहा है। हाल ही में यहां एक हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिसके नतीजे दुनिया भर में महसूस किए गए हैं। कभी हिंदू बहुल रहे इस इलाके में अब हिंदुओं का वजूद ही खतरे में है और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है कि कुछ ही दिनों में यहां 200 से ज़्यादा हमले हो चुके हैं।

78 परसेंट से घटकर 9 परसेंट पर

अगर आप मैमनसिंह जिले का इतिहास देखें, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। 1937 के आसपास इस इलाके में 78 परसेंट हिंदू आबादी थी। हालांकि, आज यह संख्या घटकर सिर्फ़ 9 परसेंट रह गई है। आरोप हैं कि ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे बसे इस जिले से हिंदुओं को सिस्टमैटिक तरीके से निकाला जा रहा है। 51 लाख से ज़्यादा आबादी वाले इस ज़िले में अब 90 परसेंट आबादी मुस्लिम है।

दीपू दास की हत्या और डरावनी सच्चाई

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने दुनिया को दिखा दिया है कि मैमनसिंह में हालात कितने खराब हैं। पुलिस ने दीपू चंद्र दास को हिरासत में लिया था, लेकिन भीड़ ने उन्हें पुलिस के चंगुल से खींचकर मार डाला। इस घटना ने बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 2025 में अब तक इस ज़िले में मंदिरों और हिंदुओं पर 10 बड़े हमले हो चुके हैं, जबकि अगस्त 2024 में एक ही महीने में 183 हिंसक घटनाएं हुईं।

हिंदुओं के कल्चरल सेंटर पर अब हमला

मैमनसिंह बांग्लादेश के सबसे बड़े दुर्गा मंदिर (दुर्गाबाड़ी) और रामकृष्ण परमहंस के मंदिर का घर है। ऐतिहासिक रूप से, इस जगह को हिंदुओं का गढ़ माना जाता है। हालांकि, यह गढ़ अब उनके लिए श्राप बनता जा रहा है। चूंकि यहां ढाका जैसी सिक्योरिटी नहीं है, इसलिए यह कट्टरपंथियों के लिए वरदान है। 1971 में पाकिस्तान से आज़ादी के बाद यहां हिंदुओं की बहुत ताकत थी, लेकिन अब उसी हिंदू समुदाय को वहां पराया माना जा रहा है।

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एजेंडे में सुरक्षा का मुद्दा

हसीना के सत्ता में आने के बाद से मयमनसिंह ज़िला हिंसा का अड्डा बन गया है। प्रशासन की लापरवाही और पुलिस की लाचारी के कारण यहां बचे हुए हिंदू परिवारों में डर का माहौल है। हम कहां रहें और कहां जाएं? यह सवाल यहां के हिंदू नागरिकों द्वारा पूछा जा रहा है।

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