परमाणु बम गिराने का फैसला भारत में किसके पास

nuclear bomb india: इतिहास के पन्नों को पलटें तो हिरोशिमा और नागासाकी की तबाही आज भी रूह कंपा देती है। उस भीषण मंजर ने पूरी दुनिया को सिखाया कि एक परमाणु विस्फोट सिर्फ इमारतों को ही नहीं गिराता बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों की खुशियों को भी राख कर देता है। किसी भी देश के लिए ऐसे हमले के जख्मों से उबरना दशकों का काम होता है क्योंकि इसके दुष्परिणाम केवल तत्काल मृत्यु तक सीमित नहीं रहते।

आज के दौर में जब हम भारत और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों की बात करते हैं जिनके पास परमाणु शक्ति है तो मन में एक बड़ा सवाल उठता है। आखिर इन घातक हथियारों को चलाने का असली फैसला कौन करता है? क्या यह किसी एक व्यक्ति के हाथ में होता है?

किसके पास है असली चाबी

अक्सर लोगों को लगता है कि देश के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के पास कोई ऐसा रिमोट कंट्रोल होता है जिसे दबाते ही परमाणु मिसाइलें चल पड़ती हैं। लेकिन असलियत इससे कोसों दूर है। भारत ने अपनी सुरक्षा और जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए एक बहुत ही मजबूत और सुरक्षित ढांचा तैयार किया है। यहां कोई भी अकेला व्यक्ति अपनी मर्जी से इतना बड़ा कदम नहीं उठा सकता।

भारत में न्यूक्लियर कमांड किसके पास

भारत में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल (remote control india nuclear bomb) और उनके प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी ‘न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी’ के पास होती है। यह एक ऐसी संस्था है जो बहुत सोच-विचार के बाद ही कोई निर्णय लेती है। इस पूरी व्यवस्था को मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा गया है ताकि सत्ता और शक्ति का संतुलन बना रहे।

  • पॉलिटिकल काउंसिल: ये सबसे ऊपरी निकाय है।
  • एग्जीक्यूटिव काउंसिल: ये परिषद रणनीतिक सलाह देने का काम करती है।

प्रधानमंत्री की अहम भूमिका

इस पूरी व्यवस्था में देश के प्रधानमंत्री की भूमिका सबसे अहम होती है। वह पॉलिटिकल काउंसिल के मुखिया यानी चेयरमैन होते हैं। आपको यह जानकर हैरानी हो सकती है कि भारत के नियमों के मुताबिक केवल इसी काउंसिल (Nuclear Weapons Control In India) के पास परमाणु हमले का आदेश देने का कानूनी हक है।

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इसका मतलब यह है कि बिना एक औपचारिक प्रक्रिया और सर्वोच्च राजनीतिक नेतृत्व की मंजूरी के भारत अपने परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा।

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