होम लोन को बोझ नहीं पावर बनाओ, ये फ़ॉर्मूला लगाओ और टेंशन-फ्री हो जाओ

होम लोन के लेकर घर खरीदना किसी की भी ज़िंदगी का सबसे बड़ा और इमोशनल फ़ैसला होता है। बहुत से लोग इसके लिए सालों तक बचत करते हैं, बैंक लोन की EMI कैलकुलेट करते हैं। मगर असली सवाल यह है कि हम अपनी इनकम के हिसाब से कितने का घर खरीद सकते हैं? Rs 50 लाख या Rs 1 करोड़? इस सवाल का जवाब कोई ब्रोकर नहीं बल्कि एक आसान फ़ाइनेंशियल नियम ‘5-20-3-40’ देता है। यह नियम आपकी इनकम, बजट, EMI और डाउन पेमेंट के बीच सही बैलेंस बनाता है, ताकि घर खरीदने का सपना आपके लिए कभी फ़ाइनेंशियल बोझ न बने।

‘5-20-3-40’ नियम क्या है?

यह नियम आपको फ़ाइनेंशियली सुरक्षित रखते हुए घर खरीदने में मदद करता है।

5% नियम (मिनिमम ‘सेफ़्टी फ़ंड’)

घर की कुल कीमत का कम से कम 5% अपने फ़ंड से तैयार करना चाहिए। अगर आप 50 लाख रुपये का घर खरीद रहे हैं, तो आपके पास कम से कम 2.5 लाख रुपये का फंड होना चाहिए। (बैंक आमतौर पर 20% डाउन पेमेंट मांगते हैं, मगर 5% आपका बेसिक सिक्योरिटी डिपॉजिट होता है।)

20% रूल (लोन लिमिट)

आपको घर की कीमत का 80% से ज़्यादा उधार नहीं लेना चाहिए।50 लाख रुपये के घर के लिए आपको 40 लाख रुपये से ज़्यादा का होम लोन नहीं लेना चाहिए। इससे आपकी EMI आसानी से चुकाई जा सकती है और आपको ब्याज का भारी बोझ भी नहीं उठाना पड़ता।

3 गुना का नियम

आपके घर की कीमत आपकी सालाना इनकम के 3 गुना से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए। यह रूल सबसे ज़रूरी है।

अगर आपकी सालाना इनकम 15 लाख रुपये है, तो आपके लिए 45 लाख रुपये तक का घर सही माना जाएगा। 50 लाख रुपये का घर भी बॉर्डरलाइन है, जबकि 1 करोड़ रुपये का घर आपकी हैसियत से बाहर हो सकता है।

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40% का रूल (EMI लिमिट)

आपकी EMI की रकम आपकी महीने की सैलरी के 40% से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।

अगर आपकी महीने की इनकम 1 लाख रुपये है, तो आपकी EMI ज़्यादा से ज़्यादा 40,000 रुपये तक होनी चाहिए। इससे आपके घर के दूसरे खर्चे, सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट सुरक्षित रहते हैं।

ये रूल क्यों ज़रूरी है?

‘5-20-3-40’ रूल न सिर्फ़ घर चुनने में मदद करता है, बल्कि आपकी पूरी फ़ाइनेंशियल प्लानिंग को स्टेबल रखने में भी मदद करता है। इससे होम लोन चुकाते समय आपकी लाइफ़स्टाइल, सेविंग्स या इमरजेंसी फ़ंड पर कोई दबाव नहीं पड़ता और आप टेंशन-फ़्री रह सकते हैं।

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