US का 25% टैरिफ भी फेल; डटा रहा भारत, अब पुतिन के दूत का सीधा बयान

रूस-भारत के रिश्तों पर इस समय बहुत दबाव है। US समेत पश्चिमी देश चाहते हैं कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे। डोनाल्ड ट्रंप ने तो इस वजह से भारत पर 25 परसेंट का एक्स्ट्रा टैरिफ भी लगा दिया है। इसके बावजूद भारत में रूस के एम्बेसडर डेनिस अलीपोव ने एक अहम बयान दिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में रूस के एम्बेसडर डेनिस अलीपोव ने TASS को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि पश्चिमी रुकावटों के बावजूद, रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। हम एनर्जी रिसोर्स खरीदने के लिए भारत को अच्छी डील देने को तैयार हैं। उनका यह जवाब ऐसे समय में आया है जब दिसंबर में रूस के प्रेसिडेंट व्लादिमीर पुतिन के भारत आने की बातें हो रही हैं।
पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत-रूस के रिश्ते मजबूत
रोसनेफ्ट और लुकोइल जैसी रूसी तेल कंपनियों पर US के बैन का ज़िक्र करते हुए रूसी एम्बेसडर ने कहा कि रोसनेफ्ट और लुकोइल पर US के बैन से तेल सप्लाई पर ज़रूर असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि भारत को प्रायोरिटी देने की रूस की पॉलिसी जारी रहेगी।
भारत ने पश्चिमी दबाव का मज़बूती से जवाब दिया
भारत-रूस रिश्तों पर पश्चिमी दबाव को खारिज करते हुए, अलीपोव ने कहा कि भारत ने रूस-भारत रिश्तों को कमज़ोर करने और ज़रूरी ग्लोबल मुद्दों पर अपनी बात थोपने की पश्चिमी कोशिशों का मज़बूती से विरोध किया है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत UN सिक्योरिटी काउंसिल को दरकिनार करके लगाए गए एकतरफ़ा, गैर-कानूनी प्रतिबंधों को मान्यता नहीं देता है। उन्होंने यह भी कहा कि BRICS और SCO जैसे फ़ोरम दोनों देशों के लिए बड़े मौके देते हैं।
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कोऑपरेशन की नई दिशाएं खुलीं
रूसी राजदूत के मुताबिक, प्रतिबंधों के बीच भी भारत और रूस के बीच कोऑपरेशन की नई संभावनाएँ बन रही हैं। रूसी बाज़ार भारतीय सीफ़ूड और दूसरे सामानों के लिए एक बड़ा मौका बन रहा है। दोनों देशों में जॉइंट फ़र्टिलाइज़र प्रोडक्शन के क्षेत्र में भी काफ़ी पोटेंशियल है। अलीपोव ने कहा कि प्रस्तावित समिट में एनर्जी सिक्योरिटी से लेकर ट्रेड ग्रोथ तक कई ज़रूरी मुद्दों पर चर्चा होगी। यह मीटिंग भारत-रूस कोऑपरेशन को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगी।



