कथा में गूंजे गोकर्ण: धुंधकारी प्रसंग
श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन भक्ति में डूबे श्रद्धालु

जसवंतनगर,इटावा। नगला राम सुंदर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर भक्तिरस का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। सरस कथा वाचक पंडित सागर दास जी महाराज ने श्रीमद्भागवत महापुराण के प्रसिद्ध गोकर्ण-धुंधकारी प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया। उनकी मधुर वाणी और भावपूर्ण शैली से पूरा पंडाल भक्ति और आस्था से सराबोर हो गया।
पंडित सागर दास ने कथा के माध्यम से बताया कि धुंधकारी का जीवन पापमय था, परंतु भाई गोकर्ण की निष्ठा, सत्संग और भगवत कृपा से उसे मोक्ष प्राप्त हुआ। उन्होंने समझाया कि मनुष्य का वास्तविक कल्याण तभी संभव है जब वह जीवन में भक्ति, सेवा और सदाचार को अपनाए। कथा के दौरान नारद जी के प्रसंग पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने भक्तों को ‘नारद भक्ति सूत्र’ के महत्व से अवगत कराया।
कथा के बीच-बीच में जब हरिनाम संकीर्तन और भक्ति गीत गूंजे तो श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे। इस अवसर पर परीक्षित की भूमिका का मंचन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें श्रीमती प्रकाश सिंह और विश्वनाथ सिंह तोमर की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
ग्राम नगला राम सुंदर का वातावरण पूरे दिन आध्यात्मिक उल्लास से भरा रहा। सैकड़ों ग्रामीण श्रद्धालु कथा श्रवण कर आत्मिक शांति का अनुभव करते दिखाई दिए। आयोजक व व्यवस्थापक राजीव तोमर के अनुसार श्रीमद्भागवत कथा सप्ताहभर चलेगी, जिसमें प्रतिदिन नए दिव्य प्रसंगों का वर्णन किया जाएगा।



