आशा वर्कर्स ने सरकार से की मांगे पूरी करने की अपील

मऊ आशा वर्कर्स यूनियन की ओर से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। इस ज्ञापन में आशा वर्कर्स ने अपनी विभिन्न समस्याओं और मांगों को विस्तार से रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर की आशा कार्यकर्त्रियां वर्षों से अपने हक और अधिकार के लिए संघर्षरत हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
ज्ञापन में कहा गया कि आशा वर्कर्स ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं। कोरोना महामारी से लेकर टीकाकरण, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन और अन्य योजनाओं में आशाओं ने अभूतपूर्व योगदान दिया है। इसके बावजूद उन्हें मानदेय और सुविधाओं के मामले में बेहद उपेक्षित रखा गया है। यूनियन का कहना है कि लंबे समय से आंदोलन करने और अपनी आवाज उठाने के बावजूद सरकार ने आशाओं की समस्याओं पर ठोस कदम नहीं उठाए हैं।
यूनियन ने मांग की कि बीते दिनों ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाली आशा कार्यकर्त्रियों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। इसके अलावा सभी आशा वर्कर्स को राज्य कर्मचारी का दर्जा देते हुए उन्हें नियमित वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य लाभ प्रदान किए जाएं।
ज्ञापन में कुल 9 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं। इनमें प्रमुख हैं—
1. ड्यूटी के दौरान निधन हुई आशा कार्यकर्त्रियों के परिवार को 20 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।
2. आशा वर्कर्स को समय पर प्रोत्साहन राशि व मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
3. 45 वर्ष की आयु के बाद आशा वर्कर्स को पेंशन योजना से जोड़ा जाए।
4. आशा कार्यकर्त्रियों को राज्य कर्मचारी का दर्जा देकर उन्हें न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश और सुरक्षा संबंधी लाभ दिए जाएं।
5. 46वें भारतीय श्रम सम्मेलन की संस्तुतियों को लागू किया जाए, ताकि सभी आशा वर्कर्स को सम्मानजनक जीवन मिल सके।
6. कार्य के दौरान दुर्घटना में घायल या मृत्यु होने पर न्यूनतम 20 लाख का मुआवजा दिया जाए।
7. आशा कार्यकर्त्रियों के लिए प्रदेश स्तर पर अलग से स्वास्थ्य बीमा और पेंशन योजना बनाई जाए।
8. सभी बकाया भुगतान तुरंत किए जाएं और प्रोत्साहन राशि को 10,000 रुपये मासिक मानदेय में बदला जाए।
9. आशा वर्कर्स के भुगतान की निगरानी हेतु अलग से समिति बनाई जाए।
यूनियन की अध्यक्ष छाया देवी ने कहा कि सरकार हर मंच से महिला सशक्तिकरण की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली आशा बहनों की सुध नहीं लेती। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो आशा वर्कर्स बड़े आंदोलन को बाध्य होंगी।
ज्ञापन पर जिलाध्यक्ष छाया देवी के साथ-साथ मऊ जिले की कई आशा कार्यकर्त्रियों के हस्ताक्षर किए गए। सभी ने एक स्वर में कहा कि सरकार उनके योगदान को मान्यता दे और उन्हें सम्मानजनक मानदेय व सुविधाएं उपलब्ध कराए।
इस मौके पर बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्त्रियां मौजूद रहीं। उन्होंने नारे लगाकर अपनी मांगों को मजबूती से रखा और कहा कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, उनका संघर्ष जारी रहेगा।



