8वां वेतन आयोग: क्या है फिटमेंट फैक्टर, जानें ये वेतन को कैसे बढ़ा सकता है

8वां वेतन आयोग (8th pay commission salary) से केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में जबरदस्त इजाफा होने की उम्मीद है और विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत के शेयर बाजार को भी बढ़ावा मिल सकता है।

जेपी मॉर्गन के 26 नवंबर के शोध नोट के अनुसार, वेतन पैनल की सिफारिशों से उपभोक्ता खर्च में तेजी आ सकती है, जिससे व्यवसायों को लाभ हो सकता है और संस्थागत निवेशक भारतीय बाजारों की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

जानें ये कैसे करता है काम

इस संभावित खर्च वृद्धि का मुख्य कारण फिटमेंट फैक्टर है जो वेतन संशोधन के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक गुणक है। येफैक्टर जितना ज़्यादा होगा वेतन वृद्धि उतनी ही ज़्यादा होगी।

क्या है फिटमेंट फैक्टर

फिटमेंट फैक्टर एक गुणक है जो वेतन संशोधन के दौरान कर्मचारी के मूल वेतन पर लागू किया जाता है।

उदाहरण के लिए यदि फिटमेंट फैक्टर 2.57 है और आपका वर्तमान मूल वेतन तीस हजार रुपए है, तो संशोधन के बाद नया मूल वेतन होगा:

  • नया मूल वेतन=30,000×2.57=77,
  • नया मूल वेतन = 30,000 * 2.57 = 77,100

तुलना के लिए 2008 में छठे वेतन आयोग ने वेतन में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि की थी, जिससे वाहनों, आवास और रियल एस्टेट में मजबूत मांग को बढ़ावा मिला।

इसके उल्ट सन् 2016 में सातवें वेतन आयोग ने 23-25% की मामूली बढ़ोतरी की, जिससे 2.57 के उच्च फिटमेंट फैक्टर के बावजूद रोज़मर्रा के खर्चों में मामूली वृद्धि ही हुई। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि महंगाई भत्ते (डीए) को शून्य कर दिया गया था, जिससे कुल मिलाकर प्रभाव कम हो गया।

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मौजूदा वक्त में डीए 58% है और 8वें वेतन आयोग के लागू होने तक इसके 65% को पार करने की उम्मीद है। चूँकि डीए 2016 की तुलना में कम होगा, इसलिए मामूली फिटमेंट फैक्टर भी कर्मचारियों के वास्तविक वेतन में भारी वृद्धि का कारण बन सकता है।

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