77वां प्रांतीय रक्षक दल स्थापना दिवस मनाया गया
पीआरडी जवानों की अनुशासन और सेवा भावना को सलाम

मऊ। रिज़र्व पुलिस लाइन मऊ में बुधवार को 77वां प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) स्थापना दिवस समारोह गरिमा के साथ आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत में पीआरडी जवानों द्वारा आकर्षक रैतिक परेड प्रस्तुत की गई, जिसका मान-प्रणाम अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने स्वीकार किया। इसके बाद उन्होंने जिला युवा कल्याण अधिकारी तथा परियोजना निदेशक के साथ परेड का निरीक्षण किया।
अपर पुलिस अधीक्षक ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि स्थापना दिवस केवल एक दिन मनाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उन वीर जवानों की निष्ठा, सेवा और बलिदान को याद करने का दिन है, जिन्होंने प्रदेश की सुरक्षा व सामाजिक समरसता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 1947 को देश की आज़ादी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक सद्भाव, अनुशासन और आत्म-सुरक्षा की भावना को बढ़ाने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार ने 11 दिसंबर 1948 को प्रांतीय रक्षक दल की स्थापना की थी।
उन्होंने कहा कि आज के समय में पीआरडी जवान जनपद के सभी थानों, यातायात व्यवस्था, सरकारी व गैर-सरकारी संस्थानों तथा महत्वपूर्ण कार्यालयों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। उनकी सतर्कता और सेवा भावना से जिले को लगातार सहयोग मिलता आ रहा है।
अपर पुलिस अधीक्षक ने जवानों से अपेक्षा जताते हुए कहा कि जहां भी आपकी ड्यूटी लगे, उसे पूरी निष्ठा, ईमानदारी, ऊर्जा और अनुशासन के साथ निभाएं।
उन्होंने कहा कि एक रक्षक का दायित्व केवल ड्यूटी करना नहीं, बल्कि समाज में भरोसा व सुरक्षा की भावना को मजबूत करना भी है।
कार्यक्रम प्रभारी एवं नोडल अधिकारी बीनू कुमार सिंह ने जानकारी दी कि जनपद मऊ में वर्तमान में कुल 316 पीआरडी जवान सेवा दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग दो प्रमुख कड़ियों में कार्य करता है।
पहली कड़ी प्रादेशिक विकास दल, जिसका गठन वर्ष 1948 में हुआ था। इसमें स्वयंसेवकों का चयन कर उन्हें 22 दिवसीय प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षित स्वयंसेवियों को सुरक्षा संबंधी कार्यों में लगाया जाता है तथा शासन द्वारा निर्धारित मानदेय भी दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि दूसरी कड़ी के रूप में युवा कल्याण विभाग को शामिल किया गया है। ग्रामीण युवाओं को संगठित कर उनकी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देने के उद्देश्य से वर्ष 1956 में युवक मंगल दल और वर्ष 1982 में महिला मंगल दल के गठन की शुरुआत की गई, जो आज भी सामाजिक व विकासात्मक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।



