2025 Uttar Pradesh politics: माया की धमक, आजम की हनक

2025 Uttar Pradesh politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एकाएक दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिले हैं। लखनऊ में बसपा सुप्रीमो मायावती की विशाल रैली तथा रामपुर में समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा वरिष्ठ नेता आजम खान संग मुलाकात करना। रैली के जरिए बसपा सुप्रीमो ने जहां अपनी धमक दिखाई, वहीं अखिलेश से मुलाकात के दौरान आजम की हनक सामने आई।

सियासत में मायावती और आजम अलग-अलग अंदाज के लिए भी जाने जाते हैं। लंबे समय से दोनों के सितारे गर्दिश में चल रहे हैं। politics में मायावती पहले की भांति न सक्रिय हैं, ना सफल नजर आती हैं। यही हाल आजम खान का है। कानूनी विवादों में उलझने की वजह से वह सक्रिय राजनीति नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें लगभग तेईस माह तक जेल में रहना पड़ा है।

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बात पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के चर्चाओं में आने की। कांशीराम परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में आयोजित रैली में जिस प्रकार की भीड़ उमड़ी, वह बसपा के विरोधियों की बेचैनी का कारण बन सकती है। रैली के जरिए मायावती ने शक्ति प्रदर्शन कर यह बता दिया है कि आम जनता के बीच उनकी चमक-दमक फीकी नहीं पड़ी है। दलित समाज आज भी उन्हें काफी पसंद करता है। वह दलितों के दिल में राज करती हैं।

अगले विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने अपने इरादे भी साफ कर दिए हैं। उन्होंने कहा है कि 2027 में बसपा बगैर गठबंधन के चुनाव मैदान में उतरेगी।

यानी पार्टी सुप्रीमो की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर है। मायावती ने पिछले दिनों अपने भतीजे आकाश को भी नई जिम्मेदारी सौंपी है। आकाश के पिता भी बसपा में दोबारा लौट आए हैं। वह संगठन में सुधार की दिशा में काम कर रहे हैं।

लखनऊ रैली के दरम्यान मायावती ने सबसे ज्यादा सपा की आलोचना की। जबकि योगी सरकार की प्रशंसा कर विरोधियों को और ज्यादा बेचैन कर दिया है। माना जाता है कि मायावती आगामी विस चुनाव की तैयारियों को धार देने के प्रयासों में जुट गई हैं। अब बात आजम खान की।

अखिलेश यादव से मुलाकात से पहले उन्होंने जिस प्रकार की शर्त रखी, उससे यह साबित होता है कि आजम के तेवर बदले नहीं हैं। उन्होंने अखिलेश के अलावा सपा के किसी और नेता से न मिलने की शर्त रखकर बता दिया है कि वह आज भी पार्टी में नंबर दो की हैसियत रखते हैं।

वैसे आजम की नाराजगी अपनी जगह उचित है। उन्हें इस बात की पीड़ा है कि जब वह जेल में बंद थे तब ईद के मौके पर भी सपा का कोई नेता उनके घर पर नहीं पहुंचा। हालांकि आजम खान की रिहाई के समय भी जेल के बाहर सपा का कोई कद्दावर नेता नहीं दिखाई दिया था।

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इस बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में आजम ने कहा था कि मैं छोटा नेता हूं। मुझसे मिलने कोई बड़ा नेता क्यों आएगा? अखिलेश यादव और आजम खान की मुलाकात लगभग दो साल बाद हुई है। Uttar Pradesh में लंबे समय से यह चर्चाएं जोरों पर हैं कि आजम जल्द बसपा का दामन थाम सकते हैं।

जानकारों का मानना है कि इन चर्चाओं के मध्य अखिलेश द्वारा उनसे मिलने उनके आवास पर जाना अहम मायने रखता है। दोनों नेताओं ने मेल-मुलाकात के उपरांत सोशल मीडिया पर जिस शायराना अंदाज में अपनी-अपनी बात रखी है, वह भी सुर्खियों में है।

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