लक्ष्मण-परशुराम के तीखे प्रसंगों ने बांधा समां
नगला तौर की 49 वर्ष पुरानी रामलीला में चौथे दिन हुआ मंचन,शिव धनुष टूटने पर क्रोधित परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए संवादों पर झूमे दर्शक

जसवंतनगर,इटावा। बीहड़ी क्षेत्र के नगला तौर गांव में आयोजित प्रसिद्ध मंचीय रामलीला में चौथे दिन लक्ष्मण-परशुराम संवाद का प्रभावशाली मंचन किया गया। भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़े जाने के बाद क्रोधित होकर पहुंचे परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए तीखे संवादों ने दर्शकों को खूब आकर्षित किया। कलाकारों ने सजीव अभिनय और दमदार संवाद अदायगी से रामायण के इस प्रसंग को मंच पर उतार दिया। रामलीला देखने पहुंचे दर्शक देर तक मंचन का आनंद लेते रहे।
रामायण के प्रसंग के अनुसार,माता सीता के स्वयंवर में भगवान श्रीराम के हाथों शिव धनुष टूटने की सूचना मिलने पर परशुराम क्रोधित होकर जनक की सभा में पहुंचते हैं। वहां टूटे धनुष को देखकर वह राजा जनक से पूछते हैं-
“कहहु नृप जौं यह अति प्रिय बानी। कीन्हेहु भंग धनुष मम जानी॥”
इसके बाद श्रीराम विनम्रता से स्वयं को उनका सेवक बताते हैं, लेकिन लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण उत्तरों से संवाद का प्रसंग रोचक हो उठता है। लक्ष्मण धनुष को पुराना और कमजोर बताते हुए कहते हैं-
“छुअत टूट रघुपतिहु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू॥”
लक्ष्मण के इस उत्तर से परशुराम का क्रोध और बढ़ जाता है। दोनों के बीच तीखे सवाल-जवाब, परशुराम का फरसा उठाना और श्रीराम का विनम्रता से स्थिति संभालना मंचन के प्रमुख आकर्षण रहे। कलाकारों ने संवादों के उतार-चढ़ाव और भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को रामायण के इस महत्वपूर्ण प्रसंग से जोड़ दिया।
रामलीला में परशुराम की भूमिका नगला तौर रामलीला समिति के प्रबंधक प्रेमकिशोर पाठक ने निभाई। वहीं, दिबियापुर से आए कलाकार नीरज तिवारी लक्ष्मण और इटावा से आए अनुज मिश्रा भगवान श्रीराम की भूमिका में नजर आए। तीनों कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने सराहा।
उल्लेखनीय है कि नगला तौर में पिछले 49 वर्षों से लगातार मंचीय रामलीला का आयोजन किया जा रहा है। पारंपरिक शैली और प्रभावशाली प्रस्तुतियों के कारण यहां की रामलीला क्षेत्र में विशेष पहचान रखती है। रामलीला के माध्यम से ग्रामीणों को भगवान श्रीराम के आदर्शों,मर्यादा और रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंगों से परिचित कराया जा रहा है।



