Nepal news gen z: बैन लगाने से पहले नेपाल सरकार ने की ये गलती, जल उठा पूरा देश

Nepal news gen z: बांग्लादेश की भांति अब नेपाल हिंसा की आग में जल रहा है। जनता का आक्रोश चरम पर है। सड़कों पर अराजकता का आलम है। जनप्रतिनिधियों के खिलाफ प्रदर्शन, तोड़फोड़ और आगजनी से हालात हद से ज्यादा तनाव पूर्ण हो गए हैं। आक्रोशित भीड़ ने कुछ जनप्रतिनिधियों के आवास को निशाना बनाया है।
डरे-सहमे मंत्री और सांसद धड़ाधड़ इस्तीफा देने को मजबूर हैं। उन्हें अपनी जान की चिंता सता रही है। सोशल मीडिया पर प्रतिबंध का फैसला नेपाल सरकार के गले की हड्डी बन गया है। गोलीबारी में डेढ़ दर्जन से अधिक नागरिकों की मौत और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों के घायल होने के बाद हिंसा और भड़क गई है।
सरकार को वापस लेना पड़ा फैसला (Nepal news gen z)
दबाव में आकर सरकार को सोशल मीडिया से बैन हटाना पड़ा है। इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पाए हैं। प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के समक्ष बड़ी चुनौती है। उनके एक तरफ कुआं तथा दूसरी ओर खाई है। नेपाल में नई क्रांति का आगाज पूरी दुनिया की चिंता का कारण है।
पढ़ें- खुद को समझते थे नेपाल का मोदी, अब एक वजह के चलते छोड़ा पीएम पद
बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रम एक जैसे नजर आते हैं। सिर्फ जनता की बगावत के मुद्दे अलग हैं। बांग्लादेश में आरक्षण के मुद्दे पर विद्यार्थियों ने सरकार को चुनौती दी थी। जबकि नेपाल में मामला सोशल मीडिया से जुड़ा सामने आया है। हालांकि दोनों मुल्कों ने जो एक बड़ी गलती कि वह समान दिखाई देती हैं। (Nepal news gen z)
जनाक्रोश को बलपूर्वक दबाने की रणनीति हमेशा काम नहीं आती है। ऐसा करने पर स्थिति बिगड़ने की आशंका रहती है। इस बीच नेपाल में राजशाही की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। कुछ माह पहले वहां राजशाही के समर्थन में बड़ी संख्या में नागरिक सड़कों पर उतर आए थे।
ये भी पढ़ें- Nepalese currency to inr: नेपाल में भारत के 50 रुपये की कीमत कितनी, जवाब आपको हैरान कर देगा!
भीड़ के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कटआउट व पोस्टर भी लहराए गए थे। नेपाल के मौजूदा आंदोलन में आमजन के जुड़ने से सरकार विरोधी मुहिम तेज हो गई है। मामला सिर्फ सोशल मीडिया पर बैन का नहीं रह गया है बल्कि जनता से जुड़ी समस्याओं का समाधान न होने पर भी नाराजगी सामने आ रही है। नेपाल में फैली अराजकता के पीछे सुनियोजित साजिश की आशंका से भी इनकार नहीं किया गया है।
बैन लगाने से पहले नेपाल सरकार ने की ये गलती
सोशल मीडिया पर बैन से पहले नेपाल सरकार ने संभवत: सभी जरूरी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया था। अन्यथा आज यह पेचीदा स्थिति पैदा नहीं होती। मौजूदा दौर में सोशल मीडिया आमजन की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सिक्के के दो पहलू की भांति सोशल मीडिया के भी अच्छे और बुरा प्रभाव हैं। जिस प्रकार मोबाइल के बिना गुजारा नहीं है, ठीक उसी तरह सोशल मीडिया भी अहम जरूरत बन गया है। सोशल मीडिया के सभी महत्वपूर्ण प्लेटफार्म पर बैन ने युवाओं को गुस्से से भर दिया।
आधुनिक दौर में युवाओं का इसके बगैर कतई गुजारा नहीं है। नेपाल के हालात से भारत की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। पड़ोसी देश होने के अलावा नेपाल के साथ भारत के पुराने रिश्ते हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि वहां परिस्थितियां जल्द से जल्द सामान्य हो सकें। चूंकि तख्तापलट के बाद बांग्लादेश अब तक स्थिर नहीं हो पाया है। बांग्लादेश में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ावा मिला है। विकास की गति प्रभावित है। अर्थव्यवस्था धीमी पड़ गई है। रोजगार के नए साधन उपलब्ध नहीं हो रहे हैं। नेपाल की माली हालत भी अच्छी नहीं है। हिंसा का दौर जितनी जल्दी रुक जाएगा, वह पूरे राष्ट्र के हित में होगा।



