गले में खराश और खांसी से हैं परेशान; दादी-नानी का ये खास नुस्खा देगा तुरंत राहत; 10 मिनट में ऐसे बनाएं

home remedies for throat infection: सर्दियों का मौसम हो या मौसम में अचानक बदलाव, गले में खराश, लगातार खांसी और हल्की जलन की समस्या बेहद आम हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुछ भी ठंडा या सामान्य निगलने पर गले में तेज चुभन महसूस होती है और मन कुछ ऐसा गर्मागर्म खाने का करता है जो गले को तुरंत सुकून दे।
यदि आप भी इस परेशानी से जूझ रहे हैं, तो अंग्रेजी दवाओं की जगह रसोई में मौजूद कुछ बुनियादी चीजों से तैयार पारंपरिक देसी नुस्खा आजमा सकते हैं। हमारी दादी-नानी के दौर से चला आ रहा यह असरदार नुस्खा और कुछ नहीं, बल्कि हल्दी और शुद्ध देसी घी से तैयार विशेष बेसन का हलवा (शीरा) है। यह न सिर्फ गले की तकलीफ को शांत करता है, बल्कि इसका लाजवाब स्वाद शरीर को भीतर से गर्माहट और ऊर्जा भी देता है।
बेसन का औषधीय हलवा बनाने के लिए जरूरी सामग्री
इस घरेलू रेमेडी को तैयार करने के लिए आपको बहुत कम सामग्री की जरूरत होती है। इसके लिए 1 कप शुद्ध बेसन, 2 बड़े चम्मच देसी घी, 1 छोटा चम्मच पिसी हुई हल्दी, 2 से 3 हरी इलायची (कूटी हुई), स्वादानुसार चीनी (या गुड़) और लगभग 2 से 3 कप गुनगुना पानी चाहिए। यदि आप चाहें तो अतिरिक्त पोषण के लिए बारीक कटे हुए बादाम और काजू भी शामिल कर सकते हैं।
धीमी आंच पर बेसन भूनने का सही तरीका
हलवा तैयार करने के लिए सबसे पहले एक भारी तले की कड़ाही में देसी घी गर्म करें। घी पिघलने के बाद उसमें बेसन डालें और गैस की आंच बिल्कुल धीमी रखें। बेसन को लगातार करछी से चलाते हुए भूनें ताकि वह नीचे से जले नहीं। जल्दबाजी में तेज आंच पर भूनने से बेसन कच्चा रह सकता है और उसका स्वाद बिगड़ सकता है। कुछ ही मिनटों में बेसन का रंग हल्का सुनहरा होने लगेगा और रसोई में सोंधी खुशबू फैलने लगेगी।
हल्दी और इलायची के साथ पानी मिलाने की विधि
जैसे ही बेसन अच्छी तरह भुन जाए, उसमें 1 चम्मच हल्दी पाउडर डालकर मिला लें। हल्दी में मौजूद एंटीसेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले के संक्रमण को दूर करने में रामबाण माने जाते हैं। इसके तुरंत बाद कूटी हुई इलायची डालें, जो स्वाद और सुगंध को बढ़ा देती है। अब इसमें थोड़ा-थोड़ा करके गुनगुना पानी डालें और लगातार चलाते रहें। ध्यान रहे कि पानी एक साथ डालने से बेसन में गांठें (लंप्स) पड़ सकती हैं, इसलिए धीरे-धीरे पानी डालते हुए चिकना घोल बनने तक मिलाएं।
चीनी मिलाएं और कड़ाही छोड़ने तक पकाएं
जब बेसन पानी को पूरी तरह सोख ले और मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तो इसमें स्वादानुसार चीनी मिला दें। चीनी घुलने के बाद हलवे को 2 से 3 मिनट और पकाएं। जब हलवा किनारों से कड़ाही छोड़ने लगे और एक चिकना, मखमली टेक्सचर ले ले, तो गैस बंद कर दें। इसके ऊपर कटे हुए बादाम और काजू डालकर इसे हल्का गुनगुना ही परोसें।
गले की खराश और खांसी में क्यों मिलता है तुरंत आराम?
यह हलवा गले की तकलीफ पर कई तरह से काम करता है। सबसे पहले, इसका हल्का गर्म तापमान गले को प्राकृतिक गर्माहट देता है, जिससे बलगम पिघलने और सूजन कम होने में मदद मिलती है। दूसरा, इसकी मुलायम और चिकनी बनावट के कारण छिले हुए या सूखे गले में इसे निगलना बेहद आसान होता है। तीसरा, बेसन प्रोटीन और जरूरी कार्ब्स से भरपूर होता है जो मौसमी कमजोरी को दूर कर शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है। वहीं देसी घी गले की अंदरूनी दीवारों को लुब्रिकेट करता है, जिससे सूखी खांसी और जलन में फौरन राहत महसूस होती है।
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सेवन के जरूरी नियम और सही समय
गला खराब होने पर इस हलवे को एक साथ बहुत अधिक मात्रा में खाने के बजाय एक छोटी कटोरी में सीमित मात्रा में ही खाएं। इसे खौलते हुए गर्म रूप में न खाएं, बल्कि हल्का गुनगुना होने पर धीरे-धीरे निगलें ताकि गले को सिकाई मिल सके। अत्यधिक मात्रा में घी या चीनी डालने से यह पचने में भारी हो सकता है, इसलिए इसे संतुलित रखें। रात को सोने से ठीक पहले इसका सेवन करना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि इसके बाद तुरंत पानी पीने से बचना चाहिए।



