दुनिया भर में बज गया ‘खतरे का सायरन’, महाशक्तियां क्यों जुटा रही हैं 3 महीने का राशन-पानी

Global Defense News Today: दुनिया के सबसे ताकतवर और विकसित मुल्कों में इन दिनों एक अभूतपूर्व और हैरान करने वाली तैयारी तेजी से परवान चढ़ रही है, जिसने वैश्विक स्तर पर किसी बड़े संकट की सुगबुगाहट तेज कर दी है।
जहां एक तरफ ब्रिटेन की सरकार अपने आम नागरिकों को घरों में कम से कम 72 घंटे का राशन-पानी और जरूरी सामान जुटाकर रखने की सख्त हिदायत दे रही है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका अपने प्रमुख सैन्य ठिकानों को बिना किसी बाहरी सप्लाई के लगातार 90 दिनों तक स्वतंत्र रूप से संचालित करने की महा-योजना पर काम कर रहा है।
इसी कड़ी में अब जापान भी अपने नागरिकों से भोजन, पीने का पानी और जीवनरक्षक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण करने की औपचारिक अपील करने की तैयारी में है। अचानक दुनिया के शीर्ष संपन्न देशों द्वारा इस स्तर की आपातकालीन तैयारियों में जुटने से अंतरराष्ट्रीय गलियारों में यह गंभीर सवाल तैरने लगा है कि क्या विश्व किसी अघोषित युद्ध, बड़े साइबर हमले या ग्लोबल सप्लाई चेन के ध्वस्त होने के खतरे का सामना करने जा रहा है।
तमाम देशों के सामने तात्कालिक चुनौतियां भले अलग-अलग दिख रही हों, मगर सबका साझा संदेश एक ही है कि किसी भी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय आपदा के शुरुआती दिनों में नागरिक और सामरिक संस्थान पूरी तरह आत्मनिर्भर रहें और सरकारी तंत्र पर तुरंत आश्रित न हों। इसी रणनीति के तहत ब्रिटेन ने राष्ट्रव्यापी ‘बी रेडी’ (Be Ready) अभियान का बिगुल फूंका है, जिसके तहत परिवारों को कम से कम तीन दिन के लिए पीने का साफ पानी, डिब्बाबंद सूखा भोजन, जरूरी दवाइयां, टॉर्च, बैटरी, रेडियो, पावर बैंक और नकदी अपने पास सुरक्षित रखने को कहा गया है।
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ब्रिटिश रक्षा अधिकारियों का मानना है कि भीषण बाढ़, जंगलों की आग, ग्रिड फेलियर, बड़े पैमाने पर साइबर स्ट्राइक या विदेशी विरोधी ताकतों द्वारा बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों से नागरिक जीवन पंगु हो सकता है, ऐसे में 72 घंटे का यह बफर सिस्टम जनता को सुरक्षित रखने में ढाल बनेगा। वहीं अमेरिका का फोकस सीधे अपने रक्षा तंत्र को अभेद्य बनाने पर है, जहां पेंटागन ने ‘फोर्ट्रेस’ (FORTRESS) नाम से महत्वाकांक्षी रक्षा परियोजना शुरू की है। इसके तहत अमेरिकी सैन्य ठिकाने बिजली, ईंधन, पानी और उपग्रह संचार के लिए बाहरी ग्रिड या बाहरी आपूर्ति व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहेंगे, ताकि किसी बड़े युद्ध या साइबर हमले के दौरान भी 90 दिनों तक लगातार अमेरिकी रक्षा बल पूरी क्षमता से एक्शन में रह सकें।



