धनतेरस पर सोना खरीदना फायदे का सौदा या नुकसान, जानें क्या कह रहे हैं एक्सपर्ट

US Bond Yield 5 Percent: धनतेरस और शादियों के आगामी सीजन से ठीक पहले सोने की खरीदारी करने वालों के मन में एक बड़ा सवाल कौंध रहा है कि क्या इस समय सोने में पैसा लगाना कहीं घाटे का सौदा तो नहीं साबित होगा। जिस पीली धातु के भाव के दो लाख रुपये के स्तर को छूने के कयास लगाए जा रहे थे और जिसने जनवरी में 1.75 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड उच्चतम स्तर छुआ था, वह अक्टूबर के आखिर तक लुढ़क कर करीब 1.43 लाख रुपये के दायरे में आ गया है। इस प्रकार सोने की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
घरेलू खरीदार जहां भाव गिरने से राहत महसूस कर रहे हैं, वहीं निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं कि क्या यह गिरावट आगे भी जारी रहेगी। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस लगातार मंदी की सबसे बड़ी और सीधी वजह अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड का 5 प्रतिशत से ऊपर बने रहना है।
क्या होता है अमेरिकी बॉन्ड और इसकी यील्ड का गणित
सीधे शब्दों में समझें तो बॉन्ड सरकार द्वारा लिया गया एक औपचारिक कर्ज का दस्तावेज होता है। जब अमेरिकी सरकार धन जुटाने के लिए निवेशकों से उधार लेती है, तो वह बदले में ट्रेजरी बॉन्ड जारी करती है। इस बॉन्ड पर निवेशकों को जो सालाना ब्याज या रिटर्न मिलता है, उसे बॉन्ड यील्ड कहा जाता है। मिसाल के तौर पर यदि 10 साल के अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड 5 प्रतिशत चल रही है, तो इसका मतलब है कि एक लाख डॉलर के निवेश पर अमेरिकी सरकार की गारंटी के साथ हर साल पांच हजार डॉलर का तय ब्याज मिलेगा और अवधि पूरी होने पर मूलधन सुरक्षित वापस मिल जाएगा। अमेरिकी सरकार की गारंटी के चलते वैश्विक वित्तीय संस्थान, विभिन्न देशों के केंद्रीय बैंक और दिग्गज निवेशक इसे दुनिया का सबसे सुरक्षित निवेश माध्यम मानते हैं।
सोना सस्ता होने का अमेरिकी कनेक्शन
पहले जहां अमेरिकी बॉन्ड पर 2 से 3 प्रतिशत का ही ब्याज मिलता था, वहीं हालिया भू-राजनीतिक उथल-पुथल, ईरान युद्ध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव तेज हो गया। मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए वहां के केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) को नीतिगत ब्याज दरें ऊंची रखनी पड़ीं, जिससे 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर यानी 5 प्रतिशत के पार पहुंच गई। सोना एक सुरक्षित निवेश जरूर है, लेकिन उस पर कोई नियमित ब्याज या आय नहीं मिलती। जब निवेशकों को अमेरिकी डॉलर में 5 प्रतिशत गारंटीड रिटर्न का सुरक्षित विकल्प मिल रहा हो, तो वे सोने से पूंजी निकालकर अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की ओर रुख करने लगते हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की मांग में सुस्ती आई है और भारत जैसे उभरते बाजारों से विदेशी फंड निकलकर बॉन्ड की ओर जाने से शेयर बाजार और सोने दोनों पर दबाव बना हुआ है।
अब रेलवे स्टेशन जाने की झंझट खत्म! घर बैठे ऐप से बुक करें पार्सल, रेलवे खुद आएगा सामान लेने
धनतेरस और शादी के सीजन में क्या करें खरीदार
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित नहीं होतीं और अमेरिका में ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू नहीं होता, तब तक बॉन्ड यील्ड अगले 5-6 महीनों या उससे अधिक समय तक ऊंची बनी रह सकती है। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के बावजूद आगे दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं से सोने की कीमतों में तत्काल किसी बड़ी उछाल की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। ऐसे में जानकारों की सलाह है कि धनतेरस के मौके पर शगुन या शादियों की व्यक्तिगत जरूरतों के लिए खरीदारी करना एक बेहतर अवसर हो सकता है क्योंकि भाव अपने उच्च स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं, लेकिन शुद्ध रूप से अल्पावधि मुनाफे के लिए बड़ा निवेश करने वालों को वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल के रुख पर नजर बनाकर सतर्क रहने की जरूरत है।



