इंदौर में पीएम मोदी की मिमिक्री पर घिरे राहुल गांधी और कॉमेडियन पुलकित मणि, सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा

देश में स्टैंडअप कॉमेडी और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसिंग के नाम पर जिस तरह का कंटेंट परोसा जा रहा है, उसने अब गंभीर बहस छेड़ दी है। बिना किसी ठोस टैलेंट या बौद्धिक समझ के महज फूहड़ और राजनीतिक तंज कसकर लोकप्रियता पाने की होड़ सामाजिक माहौल को दूषित कर रही है। हालिया विवाद मध्य प्रदेश के इंदौर शहर से सामने आया है, जहां ‘छात्रों की गूंज’ नामक मंच पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कॉमेडियन पुलकित मणि ने साथ मिलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की। इस हरकत के सामने आते ही सोशल मीडिया यूजर्स दोनों पर भड़क उठे हैं और उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई जा रही है।

छात्रों के मंच का राजनीतिक इस्तेमाल, पीएम मोदी को बनाया निशाना

इंदौर में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्र हितों, युवा रोजगार और शिक्षा व्यवस्था पर विमर्श होना चाहिए था। यदि हास्य-व्यंग्य के जरिए मौजूदा शैक्षणिक विसंगतियों पर तंज कसा जाता, तो वह समाज को स्वीकार्य और विचारणीय लगता। लेकिन मंच का इस्तेमाल विशुद्ध रूप से राजनीतिक विरोधियों को नीचा दिखाने और निजी हमले करने के लिए किया गया। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अंग्रेजी भाषा और उनकी वैश्विक ‘हग डिप्लोमेसी’ का मखौल उड़ाने का प्रयास किया गया, जिसे कई लोगों ने बेहद बचकाना और गैर-जिम्मेदाराना करार दिया है।

वृद्ध महिला को कुर्सी देने जैसी भारतीय संस्कृति पर उड़ाया मजाक

विवाद का सबसे संवेदनशील पहलू तब सामने आया जब एक सार्वजनिक सभा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा एक बुजुर्ग महिला को ससम्मान बैठने के लिए कुर्सी ऑफर करने की घटना पर मिमिक्री की गई। देश की सनातन संस्कृति और ‘अतिथि देवो भव:’ के संस्कारों में बुजुर्गों का आदर सर्वोच्च माना गया है। किसी वृद्ध महिला को सहारा देने या कुर्सी देने जैसे नेक और गरिमापूर्ण आचरण को कॉमेडी का विषय बनाकर पेश करना भारतीय मूल्यों और संस्कारों का सीधे तौर पर अपमान माना जा रहा है, जिसे लेकर जनता के बीच गहरा रोष देखा जा रहा है।

चुनावी हार से उपजी कुंठा या भटका हुआ विपक्ष?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केंद्र और राज्यों के चुनावों में लगातार मिल रही पराजय के बाद कांग्रेस पार्टी आंतरिक आत्ममंथन करने के बजाय इस तरह के हथकंडों का सहारा ले रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर अक्सर इस तरह के सतही हमलों के जरिए सुर्खियों में बने रहने का प्रयास किया जाता है। जनता से जुड़े वास्तविक और ज्वलंत मुद्दों पर तथ्यात्मक चर्चा करने के बजाय व्यक्तिगत उपहास उड़ाना विपक्ष की रणनीति पर भी सवाल खड़े करता है।

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विवादों के सहारे लोकप्रियता बटोरने का चलन, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला

कॉमेडियन पुलकित मणि का नाम इस कार्यक्रम से पहले आम जनता के बीच अधिक प्रचलित नहीं था, लेकिन इस विवाद के बाद वे सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गए हैं। हाल के वर्षों में कॉमेडी जगत में ऐसे कई नाम उभरे हैं, जिन्होंने विषय वस्तु और कला के बजाय विवादित बयानों और बेहूदा हरकतों के दम पर पहचान बनाने की कोशिश की है। पूर्व में भी कुछ कॉमेडियनों की अमर्यादित टिप्पणियों का मामला देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) तक पहुंच चुका है, जहां न्यायपालिका को भी कड़ी नाराजगी जाहिर करनी पड़ी थी। स्वस्थ हास्य वही है जो चेहरों पर सहज मुस्कान लाए, न कि घृणा और विवाद पैदा करे।

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