18 घंटे काम लेकिन सैलरी दस हजार, जानें प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस के कर्मियों का हाल

इंडियन रेलवे की सबसे प्रीमियम ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस है। वंदे भारत ट्रेन पॉपुलैरिटी के पीक पर है। पैसेंजर्स का रिस्पॉन्स बढ़ रहा है। पिछले 6 सालों में 7 करोड़ से ज़्यादा पैसेंजर्स ने इस ट्रेन में सफर का मज़ा लिया है। इंडियन रेलवे की सूरत बदलने वाली वंदे भारत सिर्फ़ एक ट्रेन नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भर भारत का सिंबल बन गई है। हालांकि, इसी समय वंदे भारत ट्रेन में सर्विस देने वाले एम्प्लॉइज की हालत सामने आई है। बताया जाता है कि वे दिन में 18 घंटे मेहनत करते हैं मगर सैलरी में सिर्फ़ 10 हज़ार रुपये मिलते हैं।
अभी, वंदे भारत ट्रेन पूरे देश में 164 सर्विस चेयर कार दे रही है। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से MP कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने रेलवे में प्राइवेटाइजेशन और वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन में सफर के दौरान कर्मचारियों को परेशान किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने वंदे भारत ट्रेन में 18 घंटे काम कर रहे प्राइवेट कर्मचारियों की शिकायतें सुनीं और समझीं। इसके बाद उन्होंने मामले को सीधे पार्लियामेंट और रेल मंत्री तक ले जाने के लिए अधिकारियों से बातचीत शुरू की। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।
काम ज्यादा, मेहनताना कम
कांग्रेस MP इमरान मसूद ने हाल ही में वंदे भारत ट्रेन में सफर किया। उन्होंने वहां काम कर रहे सफाई और कैटरिंग कर्मचारियों से बातचीत की। उन्हें पता चला कि कॉन्ट्रैक्टर उन्हें सिर्फ 10 हजार देते हैं, उनसे दिन में 18 घंटे काम करवाया जाता है। इमरान मसूद ने अपनी टीम को बुलाया और सभी दिक्कतों पर ध्यान देने को कहा। वंदे भारत ट्रेन के सफाई और कैटरिंग कर्मचारी मशीन की तरह काम कर रहे हैं। उन्हें हर एक को 10 हजार रुपये दिए जाते हैं। उनसे दिन में 18 घंटे काम करवाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वंदे भारत ट्रेन के कर्मचारियों को मिनिमम वेज भी नहीं दिया जाता है।
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इस बीच, इमरान मसूद ने लोकसभा में इस मुद्दे को उठाने के लिए एक सवाल तैयार करने का निर्देश दिया। अगर वंदे भारत ट्रेन ठीक से चले, तो समय दो घंटे कम हो सकता है। उन्होंने अपनी टीम को इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए 28 फरवरी को रेल मंत्री के साथ एक मीटिंग करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी बताया कि वंदे भारत ट्रेन के कर्मचारियों को सिर्फ़ तीन घंटे सोने की इजाज़त है। स्लीपर क्लास ट्रेनों में सोने के लिए मिनिमम जगह होती है, मगर वंदे भारत में सोने की कोई जगह नहीं है।



