UPI Autopay Rules: 1 जनवरी से लागू होंगे 8 बड़े बदलाव
UPI Autopay Rules: OTT प्लेटफॉर्म, म्यूजिक ऐप या अलग-अलग सब्सक्रिप्शन के लिए आपके बैंक अकाउंट से ऑटोमैटिक पैसे कटने के प्रोसेस में अब ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी आएगी। NPCI ने कस्टमर्स की सिक्योरिटी और सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस सिस्टम में बड़े बदलाव किए हैं।
अभी तक कस्टमर्स को अपने अलग-अलग ऑटो-पेमेंट को ट्रैक करने के लिए हर एक ऐप को चेक करना पड़ता था। लेकिन, अब किसी भी UPI ऐप के ‘मैनेज बैंक अकाउंट’ सेक्शन में जाकर, सभी एक्टिव ऑटो-पे मैंडेट एक ही जगह पर देखे जा सकते हैं और वहीं से उन्हें बंद या मैनेज किया जा सकता है।
NPCI के 7 अक्टूबर 2025 के सर्कुलर के मुताबिक, सभी बैंकों और UPI ऐप को इन नए नियमों को लागू करने के लिए 31 दिसंबर 2025 तक का समय दिया गया है। नया सिस्टम 1 जनवरी 2026 से पूरी तरह से चालू हो जाएगा।
pan aadhaar linking: घर बैठे 2 मिनट में लिंक करें PAN-Aadhaar, ये है सबसे आसान तरीका
जैसे हम मोबाइल नंबर पोर्ट करते हैं, वैसे ही अब कस्टमर्स अपने मौजूदा ऑटो-पे मैंडेट को एक UPI ऐप से दूसरे में आसानी से ट्रांसफर (पोर्ट) कर सकते हैं। इससे कस्टमर के लिए कोई ऐप पसंद न आने पर सर्विस बदलना आसान हो जाएगा।
अब किसी भी ऑटो-पे मैंडेट को बदलने, अपडेट करने या पोर्ट करने के लिए ‘UPI PIN’ वेरिफिकेशन ज़रूरी कर दिया गया है। इससे साइबर बदमाशों के लिए कस्टमर की मंज़ूरी के बिना कोई भी बदलाव करना नामुमकिन हो जाएगा।
अगर कोई मर्चेंट या कंपनी अपना पेमेंट गेटवे या UPI ID बदलती भी है, तो कस्टमर को दोबारा नया मैंडेट सेट अप करने की ज़रूरत नहीं होगी। यह प्रोसेस बैकएंड पर अपने आप हो जाएगा, जिससे कस्टमर का समय बचेगा।
कई कंपनियाँ कस्टमर को कैशबैक का लालच देकर या बार-बार नोटिफ़िकेशन भेजकर प्लेटफ़ॉर्म बदलने के लिए मजबूर करती हैं। नए नियमों के तहत, किसी भी कस्टमर को इस तरह अपना मैंडेट पोर्ट करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
31 दिसंबर, 2025 तक चलने वाले सभी पुराने ऑटो-पेमेंट बिना किसी रुकावट के चलते रहेंगे। नए साल में पुराने पेमेंट को नए सिक्योरिटी फ्रेमवर्क के तहत लाया जाएगा, लेकिन तब तक कस्टमर सर्विस में कोई रुकावट नहीं आएगी।
ये बड़ी समस्या होगी दूर
लोग अक्सर सब्सक्रिप्शन के बारे में भूल जाते हैं और पैसे कटते रहते हैं। अब, क्योंकि सभी मैंडेट दिखेंगे, इसलिए अनचाहे सब्सक्रिप्शन को कैंसिल करना आसान हो जाएगा। इससे डिजिटल ट्रांज़ैक्शन में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और आम आदमी के साथ होने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड को रोका जा सकेगा।



