up politics 2025 new update: योगी राज में ये क्या, सांसद ने खुद को बताया सबसे बड़ा गुंडा

up politics 2025 new update: भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले का विवादित बयान 'मैं कानपुर देहात का सबसे बड़ा हिस्ट्रीशीटर हूं' यूपी सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

up politics 2025 new update: अगर गुंडों की बात की जाएगी, तो मुझसे बड़ा गुंडा कोई नहीं है। मैं कानपुर देहात का सबसे बड़ा हिस्ट्रीशीटर हूं। भाजपा सांसद देवेंद्र सिंह भोले का यह बयान उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है। सत्ता पक्ष के सांसद के बयान पर सपा ने कटाक्ष किया है। सपा ने कहा कि दो इंजन आपस में भिड़ रहे हैं। जो व्यक्ति दूसरों को गुंडों की सरकार कहते थे, वे खुद लड़ रहे हैं। ऐसे में ये विकास क्या कराएंगे?

दरअसल मामला कानपुर का है। जहां सरकारी मीटिंग के दरम्यान सांसद देवेंद्र सिंह भोले और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी में भिड़ंत हो गई। डीएम और एसपी की मौजूदगी में सांसद एवं पूर्व सांसद में पहले जुबानी जंग हुई। फिर नौबत मारपीट तक की आ गई। पूर्व सांसद की पत्नी प्रतिभा शुक्ला योगी सरकार में राज्यमंत्री हैं। दोनों पक्षों में पुरानी अदावत चल रही है। यह अब खुलकर सामने आ चुकी है। पूर्व सांसद शुक्ला ने भी तैश में आकर सांसद को कह दिया कि जुबान संभाल कर बात करना।

भाजपा की अंतर्कलह को उजागर

गनीमत रही कि मामला जुबानी जंग तक सिमट गया। यदि बात आगे बढ़ती को विवाद ज्यादा बढ़ सकता था। ऐसे में पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के हाथ फूलना स्वाभाविक बात थी। इस लड़ाई ने कानपुर देहात में भाजपा की अंतर्कलह को उजागर करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी है। भाजपा को अनुशासित पार्टी माना जाता है। कार्यकर्ता से लेकर पदाधिकारी तक से अनुशासन को बनाए रखने की उम्मीद की जाती है, मगर समय-समय पर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं, जो पार्टी के अंदर की कलह की पोल-पट्टी खोल डालते हैं।

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दीपावली पर्व के दरम्यान भगवान राम की नगरी अयोध्या में दीपोत्सव समारोह के समय योगी सरकार के शीर्ष नेतृत्व में मनमुटाव की खबरें सामने आई थीं। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने ऐन वक्त पर समारोह में जाना कैंसिल कर दिया था। इसके पीछे की वजह यह बताई गई थी कि दीपोत्सव के निमंत्रण पत्र में दोनों डिप्टी सीएम के नाम का जिक्र नहीं था। इसके चलते वह नाराज हो गए थे।

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यूपी में सीएम बनाम डिप्टी सीएम से जुड़ी खबरें अक्सर चर्चाओं में रहती हैं। हालांकि हर बार मामले को मैनेज कर लिया जाता है। यूपी विधानसभा चुनाव में डेढ़ साल का समय शेष है। अगले साल से पार्टी द्वारा चुनावी तैयारी तेज की जा सकती हैं। ऐसे में कानपुर देहात जैसी घटनाएं कतई अच्छे संकेत नहीं हैं। यदि वरिष्ठ नेताओं में मनमुटाव रहेगा तो निचले स्तर पर संगठन को मजबूत करना कैसे संभव हो पाएगा?

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सांसद एवं पूर्व सांसद में टकराव से न सिर्फ भाजपा की छवि को धक्का लगा है बल्कि पुलिस-प्रशासन तथा जनता के बीच गलत मैसेज भी गया है। खुद को सबसे बड़ा गुंडा बताकर सांसद ने कोई तीर नहीं मारा है। बड़बोलापन दिखाने से पहले उन्हें यह समझना चाहिए था कि वह जो बोल रहे हैं, उसके मायने जनता क्या निकालेगी?

सवालों के घेरे में सरकार

एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सूबे से गुंडे-माफिया का सफाया करने का दावा करते हैं, दूसरी ओर उन्हीं की पार्टी के सांसद खुलेआम गुंडागर्दी की बात कर सरकार की अपराधों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का मखौल उड़ा रहे हैं। डीएम और एसपी की उपस्थिति में यदि किसी आम नागरिक ने इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर दिया होता तो अब तक उसे इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ता।

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