गांवों के लोगों की सेहत सुधारने वालों को खुद बेहतर हक का इंतजार

सुजीत कुमार मऊ।
मऊ। उत्तर प्रदेश के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने वाले सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (CHO) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘सीएचओ संघ उत्तर प्रदेश’ और ‘सीएचओ यूनियन उत्तर प्रदेश’ के संयुक्त बैनर तले संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक 9 सूत्रीय ज्ञापन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक के माध्यम से सौंपा है। अपनी मांगों के समयबद्ध और न्यायसंगत समाधान की मांग को लेकर जिला CHO यूनियन ने सीएमओ और डीसीपीएम को अपना ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के जरिए संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि प्रदेश भर के ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ में तैनात सीएचओ प्राथमिक स्वास्थ्य तंत्र की रीढ़ की हड्डी हैं। वे न केवल ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में लोगों तक इलाज पहुंचा रहे हैं, बल्कि टेलीमेडिसिन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं, गैर-संचारी रोगों की स्क्रीनिंग, और विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर लागू करने में दिन-रात जुटे रहते हैं। हालांकि, इतनी निष्ठा और जिम्मेदारी से काम करने के बावजूद वर्षों से उनकी मानदेय, सामाजिक सुरक्षा, स्थानांतरण और सेवा नियमितीकरण से जुड़ी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका है।
सीएचओ संघ की 9 प्रमुख मांगें
1.PBI का मूल मानदेय में विलय: परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (PBI) को अलग से देने के बजाय इसे मूल मानदेय में मिलाकर हर महीने एकमुश्त और समय पर भुगतान किया जाए।
2.60, 000 मानदेय या 4800 ग्रेड पे: सीएचओ की बढ़ती जिम्मेदारियों को देखते हुए उन्हें हर महीने 60,000 रुपये का मानदेय या 4800 ग्रेड पे के समान वेतनमान दिया जाए।
3.पारदर्शी स्थानांतरण नीति: स्थायी कर्मचारियों की तर्ज पर सीएचओ के लिए भी नियमबद्ध और पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी बने और इसे हर साल लागू किया जाए।
4.अलग कैडर और नियमितीकरण: सीएचओ के लिए एक अलग ‘CHO कैडर’ का गठन हो और उनकी सेवा को नियमित/स्थायी करने की प्रक्रिया प्राथमिकता से शुरू की जाए।
5.DA और HRA की सुविधा: राज्य सरकार के अन्य कर्मचारियों की तरह सीएचओ को भी महंगाई भत्ता और मकान किराया भत्ता का लाभ मिले।
6.कैशलेस इलाज की सुविधा: सीएचओ और उनके आश्रित परिजनों को सरकारी कर्मचारियों की भांति मुफ्त और कैशलेस स्वास्थ्य उपचार की सुविधा दी जाए।
7.1 करोड़ का बीमा कवर: वर्तमान में लागू बीमा योजना का कवर बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये किया जाए ताकि उनके परिवारों को मजबूत सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल सके।
8.अनुभव के आधार पर वेटेज अंक: सरकारी भर्तियों में हर पूर्ण सेवा वर्ष के लिए 3 अतिरिक्त अंक (अधिकतम 5 वर्षों के लिए 15 वेटेज अंक) दिए जाएं।
9.अर्जित अवकाश की सुविधा: सीएल , मेडिकल और विशेषाधिकार अवकाश के साथ-साथ अन्य कर्मचारियों की तरह अर्जित अवकाश की सुविधा भी मिले।
लोकतांत्रिक तरीके से मांग रहे अपना हक
सीएचओ संघ के जिला अध्यक्ष ने कहा कि उनकी मांगें किसी अन्य संवर्ग या कर्मचारी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि यह केवल उनके काम के अनुरूप सम्मान, सुरक्षा और न्यायसंगत अधिकार की मांग है।
संघ के नेताओं ने कहा कि वे लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से सरकार के साथ बातचीत करके समाधान में विश्वास रखते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें, प्रतिनिधिमंडल के साथ शासन स्तर पर वार्ता आयोजित करें और विभागीय स्तर पर लिखित कार्रवाई के निर्देश जारी करें।



