मौत बांट रहा है यूपी का ये जिला, सांस लेना भी हुआ दूभर

एक दौर ऐसा था जब गाजियाबाद की पहचान ‘क्राइम सिटी’ के रूप में होती थी। लूट, डकैती, अपहरण, रंगदारी की वसूली के अलावा अपराधियों के बीच खूनी गैंगवार होना आम बात थी। लॉटरी, जुआ, सट्टेबाजी और मादक पदार्थों की तस्करी बेधड़क होती थी। जघन्य अपराधों और अनैतिक कार्यों की वजह से बदनाम गाजियाबाद में आने से बाहरी नागरिक कतराते थे।

चुकाना पड़ता था गुंडा टैक्स

छोटे-बड़े कारोबारियों को गुंडा टैक्स चुकाना पड़ता था। समय के साथ हालात बदलते चले गए। अपराधों में कमी आने के साथ-साथ गाजियाबाद आज औद्योगिक हब, मेडिकल हब, रियल स्टेट हब, एजुकेशन हब के कारण विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वसुंधरा, वैशाली, कौशाम्बी, सूर्यनगर, चंद्र नगर, रामप्रस्थ, राजेंद्र नगर, राजनगर, कविनगर जैसी पॉश कॉलोनियों ने इस शहर की ख्याति में चार चांद लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस बीच पिछले कुछ साल में वायु प्रदूषण की विकट समस्या उत्पन्न हुई है।

यह समस्या दूर होने की बजाए निरंतर बढ़ रही है। यह खबर वाकई बेहद चिंताजनक है कि गाजियाबाद का लोनी दुनिया का सबसे प्रदूषित क्षेत्र बन चुका है। दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित देश की तोहमत जहां पाकिस्तान को झेलनी पड़ रही है, वहीं लोनी में बढ़ते प्रदूषण ने भारत की छवि को प्रभावित किया है। स्विट्जरलैंड की संस्था आईक्यूएयर की ताजा रिपोर्ट ने लोनी में प्रदूषण की भयावह स्थिति को उजागर किया है।

गाजियाबाद की तीन बड़ी समस्याएं

इस ज्वलंत समस्या के तीन मुख्य कारण बताए गए हैं। पहला जर्जर सड़कें। क्षतिग्रस्त सड़कों पर दिनभर वाहनों की आवाजाही होने पर धूल का गुब्बार बराबर उठता रहता है। दूसरा कारण अवैध उद्योग। लोनी में अवैध उद्योगों की भरमार हमेशा रही है। दिल्ली में सख्ती होने पर अक्सर वहां बंद उद्योगों को लोनी में शुरू कर दिया जाता है। दरअसल इस क्षेत्र में छोटे उद्योग के लिए किराए पर आसानी से जगह उपलब्ध हो जाती है।

मोटे किराए के लालच में भवन स्वामी अपनी संपत्ति को किराए पर उठाने में गुरेज नहीं करते। तीसरा कारण दिल्ली की प्रदूषित हवा का लोनी में आना। दिल्ली में फिलहाल भाजपा की सरकार है। इसके बाद भी यदि वहां अवैध उद्योग फल-फूल रहे हैं तो सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोनी क्षेत्र में जींस रंगाई और पुराने तारों को जलाकर गलाने जैसे लघु उद्योग बड़ी संख्या में संचालित हैं। जींस रंगाई के बाद एकत्र प्रदूषित पानी को नाले-नालियों में बहा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त कबाड़ और पुराने तारों को जलाए जाने से आसपास की हवा जहरीली होती है।

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प्रदूषण नियंत्रण विभाग आमतौर पर पुलिस बल के साथ जमीनी स्तर पर कार्रवाई करता है, मगर स्थिति में बड़ा सुधार नहीं आ पाता। बढ़ते प्रदूषण का असर जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ता है। धीरे-धीरे वह गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं। लोनी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए युद्धस्तर पर प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

दुनिया के इस सबसे प्रदूषित शहर की तरफ से शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने यदि मुंह मोड़े रखा तो भविष्य में इसके भयावह परिणाम सामने आएंगे। चूंकि वायु में घुले जहरीले कण सांस लेने की प्रक्रिया के दरम्यान निरंतर शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। यह स्थिति शरीर को बीमारी के केंद्र के रूप में तब्दील कर रही है। लोनी की जनता को भी इस मुद्दे पर एकजुट होकर पुरजोर तरीके से आवाज उठानी पड़ेगी।

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