एक योद्धा के रूप में उभर कर आए हैं सपा जिलाध्यक्ष इं. वीरेंद्र यादव
विषम परिस्थितियों में कार्यकर्ताओं के लिए ढाल बन कर खड़े हुए जिलाध्यक्ष

आर पी राजन
ब्यूरो चीफ स्टार एक्सप्रेस
रायबरेली। पिछले महीने रायबरेली की सियासत में घटे घटनाक्रम ने समाजवादी पार्टी के भीतर एक ऐसे नेतृत्व को मजबूती से स्थापित किया, जिसकी चर्चा अब जिले की राजनीतिक गलियारों से निकलकर प्रदेश की सियासत तक होती दिखाई दे रही है। यह चेहरा कोई और नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष इं. वीरेंद्र यादव का है। पार्टी समर्थकों की नजर में हालिया घटनाक्रम ने उन्हें एक जुझारू, कर्मठ और कार्यकर्ताओं के सुख-दुख में मजबूती से खड़े रहने वाले एक नए योद्धा रूप में स्थापित किया है।
बीते 17 सितंबर को समाजवादी पार्टी की छात्र सभा के नेताओं और एबीवीपी कार्यकर्ताओं के बीच हुए विवाद के बाद जिस तरह पार्टी के बैनर फाड़े जाने को लेकर सपा जिलाध्यक्ष इं. वीरेंद्र यादव ने पुलिस प्रशासन के सामने अपनी आपत्ति दर्ज कराई, उसने उनके व्यक्तित्व एवं उनके नेतृत्व शैली का एक अलग ही रूप सामने रखा, आमतौर पर शांत, शिष्ट और शिक्षित व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाने वाले वीरेंद्र यादव उस मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर बेहद मुखर नजर आए। कोतवाल के साथ उनकी तीखी बहस का वीडियो और घटनाक्रम जब कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचा तो सपा समर्थकों में इसकी अलग तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। कार्यकर्ताओं का मानना है कि जिलाध्यक्ष ने यह संदेश दिया कि पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता अकेला नहीं है और संगठन का नेतृत्व जरूरत पड़ने पर उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
यही वजह रही कि इस घटनाक्रम के बाद वीरेंद्र यादव की छवि महज संगठन के जिलाध्यक्ष की ना रहकर एक ऐसे नेता की बनती दिखाई दी, जो सत्ता और प्रशासन के सामने भी अपने कार्यकर्ताओं की आवाज मजबूती से उठाने का साहस रखता है। लंबे समय से शांत और संतुलित राजनीतिक शैली के लिए पहचाने जाने वाले वीरेंद्र यादव का यह आक्रामक तेवर समाजवादी कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा का विषय बन गया।
इसी घटना के दौरान सपा विधायक राहुल लोधी ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया और इसके बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के रायबरेली पहुंचने और जनसभा को संबोधित करने से जिले की राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ गई।
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में यूपी की सियासत को “लोधी बनाम योगी” के रूप में पेश किया। राजनीति के जानकार इसे पिछड़े वर्ग, विशेषकर लोधी समाज के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने की रणनीति के तौर पर देख रहे हैं। लेकिन इस के बीच सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इं. वीरेंद्र यादव लगातार अपने विधायक से लेकर सामान्य कार्यकर्ता तक के साथ मजबूती से खड़े दिखाई दिए।
संगठन में अक्सर पद और कद की चर्चा होती है, लेकिन अब जिले में सपा कार्यकर्ताओं को यह विश्वास हो गया है कि परिस्थिति चाहे कितनी भी विषम क्यों ना हो, संगठन उनके साथ हर स्थिति में खड़ा है। अखिलेश यादव द्वारा अपनी रथ यात्रा की शुरुआत रायबरेली से किए जाने से प्रदेश भर में ना केवल जिले की अहमियत को और बढ़ा दिया है बल्कि जिले के मजबूत और संघर्षशील नेतृत्व पर कार्यकर्ताओं के विश्वास को और मजबूत किया है।
कार्यकर्ताओं के बीच यह भावना मजबूत हुई है कि यदि जिलाध्यक्ष स्वयं मोर्चे पर मजबूती से खड़े रहेंगे तो संगठन का कार्यकर्ता भी किसी राजनीतिक चुनौती से पीछे नहीं हटेगा।
यही कारण है कि रायबरेली के समाजवादी कार्यकर्ताओं के बीच इं. वीरेंद्र यादव को लेकर उत्साह बढ़ा है। समर्थकों की नजर में वह अब केवल पार्टी के जिलाध्यक्ष नहीं है बल्कि संगठन की आवाज, कार्यकर्ताओं की ढाल और मुश्किल वक्त में नेतृत्व करने वाले योद्धा के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। आने वाले विधानसभा चुनाव में यह राजनीतिक ऊर्जा किस रूप में सामने आएगी, यह तो समय ही बताएगा लेकिन इतना जरूर है कि हालिया घटनाक्रम ने रायबरेली में इं. वीरेंद्र यादव के राजनीतिक कद और संगठन पर उनकी पकड़ को नई मजबूती दी है।


