यूक्रेन के हमलों की वजह से रूस में ईंधन का संकट! भारत ‘मसीहा’ बनकर उभरा, भेजी मदद

Russia Fuel Crisis 2026: भारत और रूस की दोस्ती दशकों से कायम है। रूस अभी भी भारत को कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) सप्लाई करने वाला सबसे बड़ा देश है। हालांकि, अब हालात कुछ बदल रहे हैं; भारत रूस को पेट्रोल सप्लाई करने वाला एक अहम देश बन गया है। यूक्रेन की ओर से रूस की तेल रिफाइनरियों पर लगातार ड्रोन हमलों ने देश में ईंधन के उत्पादन पर असर डाला है, जिससे रूस को पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है।

जहाज़ों को ट्रैक करने वाले डेटा के अनुसार, अगस्त में रूस का समुद्री रास्ते से पेट्रोल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, क्योंकि रिफाइनरियों पर हमलों के कारण देश में ईंधन का उत्पादन घट गया था। इस दौरान, भारत रूस को पेट्रोल सप्लाई करने वाले प्रमुख देशों में से एक बनकर उभरा।

रूस का पेट्रोल आयात रिकॉर्ड स्तर पर

एनर्जी एनालिटिक्स फर्म ‘वोर्टेक्स’ (Vortexa) के डेटा से पता चलता है कि रिफाइनरियों पर बार-बार हुए हमलों से देश में ईंधन का उत्पादन प्रभावित हुआ। नतीजतन, अगस्त में रूस का समुद्री रास्ते से पेट्रोल का आयात बढ़कर लगभग 125,000 बैरल प्रति दिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि भारतीय रिफाइनरियों ने पिछले दो महीनों में रूस को लगभग दस लाख (एक मिलियन) बैरल पेट्रोल सप्लाई किया है।

इस सप्लाई का एक बड़ा हिस्सा गुजरात की वाडिनार रिफाइनरी से आया। इस रिफाइनरी का संचालन ‘नयारा एनर्जी’ (Nayara Energy) करती है, जिसमें रूस की सरकारी तेल कंपनी ‘रोसनेफ्ट’ (Rosneft) की 50% हिस्सेदारी है।

2022 से रूस से भारत की बड़ी मात्रा में तेल खरीद

2022 से, भारत पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनाने के लिए ज़रूरी कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा रूस से खरीद रहा है। मध्य पूर्व में संघर्षों के कारण अन्य क्षेत्रों से तेल की सप्लाई में रुकावट आई है, जिससे रूस से भारत की कच्चे तेल की खरीद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जून और जुलाई में, भारत ने रूस से प्रतिदिन 26 लाख (2.6 मिलियन) बैरल से ज़्यादा कच्चा तेल आयात किया। फरवरी में यह आंकड़ा केवल 10 लाख (1 मिलियन) बैरल प्रति दिन था। इससे पता चलता है कि कुछ ही महीनों में रूस से तेल आयात में भारी बढ़ोतरी हुई है। डेटा से पता चलता है कि अब भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी आधे से ज़्यादा है।

रूस में ईंधन संकट बढ़ा

दुनिया के प्रमुख कच्चे तेल निर्यातक देशों में से एक, रूस अब ऐसी स्थिति में है कि उसे पेट्रोल आयात करना पड़ रहा है। यूक्रेन द्वारा रूस के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और रिफाइनरियों पर किए गए ड्रोन हमलों के कारण देश में पेट्रोल का उत्पादन 70 प्रतिशत तक गिर गया है। इस वजह से देश में ईंधन की कमी हो गई है, जिससे मॉस्को को पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पूरे देश में ईंधन की बिक्री पर भी पाबंदियां लागू कर दी गई हैं।

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अगस्त में, भारत, तुर्की और मोरक्को जैसे देशों ने रूस को पेट्रोल की सप्लाई की। रूस घरेलू स्तर पर ईंधन की सप्लाई और मांग के बीच बढ़ते असंतुलन से जूझ रहा है।

पेट्रोल और डीज़ल के निर्यात पर पाबंदियां

जुलाई में, रूस ने पेट्रोल के निर्यात पर लगी अपनी पाबंदी को—जो उत्पादन करने वाली और उत्पादन न करने वाली, दोनों तरह की कंपनियों पर लागू थी—जनवरी 2027 के आखिर तक बढ़ा दिया। साथ ही, डीज़ल के निर्यात पर लगी पाबंदियों को भी 1 सितंबर, 2026 तक बढ़ा दिया गया है।

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