जानें बॉलीवुड में कैसे बनाई जाती रीमेक फिल्में, किससे लेनी पड़ती है परमिशन

remake films process: फिल्म इंडस्ट्री में पिछले कुछ वर्षों से एक दिलचस्प ट्रेंड तेजी से बढ़ा है- रीमेक फिल्मों का। कभी साउथ की किसी हिट फिल्म को हिंदी में बनाया जाता है, तो कभी हॉलीवुड की कहानी को भारतीय अंदाज में पेश किया जाता है। मगर दर्शकों के मन में अक्सर सवाल उठता है कि आखिर एक रीमेक फिल्म बनती कैसे है, इसमें कितना समय लगता है और ऑफिशियल व अनऑफिशियल रीमेक में क्या फर्क होता है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
दर्शकों के लिए कहानी को नए अंदाज में ढालना
रीमेक का मतलब केवल पुरानी फिल्म को दोहराना नहीं होता। फिल्म निर्माता मूल कहानी को लेकर उसे नए दर्शकों के स्वाद के मुताबिक ढालते हैं। संवाद बदले जाते हैं। कई बार कहानी का अंत भी बदल दिया जाता है ताकि स्थानीय दर्शकों से बेहतर जुड़ाव बन सके।
उदाहरण के तौर पर अजय देवगन की फिल्म ‘शैतान’ गुजराती फिल्म ‘वश’ से प्रेरित है। हालांकि दोनों फिल्मों में कई अंतर दिखाई देते हैं। संवाद पूरी तरह अलग हैं और क्लाइमेक्स भी बदल दिया गया है। जहां गुजराती फिल्म के अंत में पिता अपनी बेटी के कान काट देता है, वहीं हिंदी संस्करण में पिता खलनायक की जुबान काट देता है और बेटी सुरक्षित रहती है। यह बदलाव हिंदी दर्शकों की संवेदनाओं को ध्यान में रखकर किया गया।
किन फिल्मों को मिलता है रीमेक बनने का मौका
हर फिल्म रीमेक के लिए नहीं चुनी जाती। निर्माता आमतौर पर वही कहानी चुनते हैं जो किसी भी भाषा या क्षेत्र के दर्शक आसानी से समझ सकें। ऐसी कहानियों को फिल्मी दुनिया में “यूनिवर्सल स्टोरी” कहा जाता है।
इसका एक बड़ा उदाहरण फिल्म ‘अर्जुन रेड्डी’ है। इसकी कहानी को व्यापक दर्शक वर्ग ने पसंद किया। इसी वजह से इसे हिंदी में ‘कबीर सिंह’ के रूप में बनाया गया और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की।
एक रीमेक फिल्म बनने में कितना समय लगता है
- रीमेक फिल्म बनाना भी लंबी प्रक्रिया होती है। आमतौर पर इसे पूरा होने में डेढ़ से ढाई साल तक का समय लग सकता है।
- राइट्स खरीदना: 6 से 12 महीने लग सकते हैं क्योंकि कई प्रोडक्शन हाउस एक ही फिल्म के अधिकार पाने की कोशिश करते हैं।
- स्क्रिप्ट अडैप्टेशन: कहानी को नई भाषा और नए परिवेश में ढालने में करीब 4 से 6 महीने लगते हैं।
- शूटिंग और एडिटिंग: फिल्म की शूटिंग और पोस्ट-प्रोडक्शन में लगभग 8 से 10 महीने का समय लग जाता है।
रीमेक बनाने की कानूनी प्रक्रिया
- भारत में किसी फिल्म का आधिकारिक रीमेक बनाने के लिए Copyright Act, 1957 के तहत कुछ जरूरी नियमों का पालन करना पड़ता है।
- सबसे पहले मूल फिल्म के निर्माताओं से अधिकार लेने के लिए एक कानूनी अनुबंध किया जाता है।
- कहानी में बदलाव करने के लिए लेखक और कभी-कभी निर्देशक की अनुमति भी जरूरी होती है।
- अगर मूल फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक या खास धुन इस्तेमाल करनी हो तो म्यूजिक कंपनी से अलग लाइसेंस लेना पड़ता है।
- निर्माता को यह भी स्पष्ट करना होता है कि फिल्म किस भाषा में बनेगी और इसे थिएटर, ओटीटी या टीवी जैसे किन प्लेटफॉर्म पर दिखाया जाएगा।
खून में है ईरान, बॉलीवुड के इन दिग्गज अभिनेताओं का खामेनेई के देश से है गहरा नाता
ऑफिशियल और अनऑफिशियल रीमेक में फर्क
फिल्म इंडस्ट्री में दो तरह के रीमेक देखने को मिलते हैं। अगर निर्माता मूल फिल्म के अधिकार खरीदकर कहानी को दोबारा बनाते हैं तो उसे ऑफिशियल रीमेक कहा जाता है। मगर जब निर्माता केवल यह कहते हैं कि उनकी फिल्म किसी दूसरी कहानी से प्रेरित है और अधिकार नहीं खरीदते, तो उसे अनऑफिशियल रीमेक माना जाता है।



