भक्ति के रंगों से सराबोर हुआ रामलीला मैदान
राधा-कृष्ण के प्रेम और ब्रज संस्कृति की दिखी मनोहारी झलक

(फूलों की होली)
जसवंतनगर,इटावा। ऐतिहासिक मैदानी रामलीला महोत्सव में गुरुवार रात रासलीला के अंतिम दिन फूलों की होली लीला का मनोहारी मंचन किया गया। वृंदावन से आई रंगरसिया रासलीला मंडली के कलाकारों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का सजीव चित्रण कर रामलीला मैदान को भक्ति और उल्लास के रंगों से सराबोर कर दिया। राधा-कृष्ण के प्रेम, भक्ति और ब्रज की सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष श्रद्धालु पहुंचे। कलाकारों ने पारंपरिक ब्रज शैली में फूलों की होली का प्रसंग प्रस्तुत किया। राधा-कृष्ण के साथ फूलों की होली खेलते कलाकारों ने ऐसा भक्तिमय वातावरण बनाया कि पूरा मैदान जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा और मनोहारी प्रस्तुतियों का आनंद लिया।
पौराणिक मान्यताओं और श्रीमद्भागवत महापुराण के दशम स्कंध में वर्णित श्रीकृष्ण की बाल एवं किशोर लीलाओं के प्रसंगों के अनुरूप कंस के अत्याचारों और भगवान श्रीकृष्ण द्वारा उसका वध किए जाने की लीला का भी प्रभावशाली मंचन किया गया। पौराणिक कथा के अनुसार कंस ने अपनी बहन देवकी और वसुदेव को कारागार में बंद कर दिया था। भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा पहुंचकर कंस का वध किया और अत्याचार से प्रजा को मुक्ति दिलाई। कलाकारों ने इस प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि अधर्म और अहंकार का अंत निश्चित है तथा अंततः धर्म की ही विजय होती है।
रासलीला का आयोजन श्रीरामलीला महोत्सव समिति की ओर से कराया गया। समिति के प्रबंधक राजीव कुमार गुप्ता बबलू, उपप्रबंधक ठाकुर अजेंद्र सिंह गौर और शुभश्री गुप्ता के नेतृत्व में धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न कराए जा रहे हैं। रासलीला का निर्देशन अवधेश कुमार मिश्रा ने किया। वृंदावन से आए कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से ब्रज की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। इसके साथ ही रासलीला कार्यक्रम का समापन हुआ।



