पाकिस्तानी सेना ने हद पार की; PoK में बगावत; प्रदर्शनकारियों ने भारत के साथ हाथ मिलाने की चेतावनी दी

Protest in POK: पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तानी सरकार और सेना के ख़िलाफ़ लोगों का गुस्सा साफ़ दिख रहा है। एक तरफ़, रावलकोट के ईदगाह मैदान में 50,000 से ज़्यादा प्रदर्शनकारी इस इलाके की आज़ादी की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ़, PoK में महिला प्रदर्शनकारी पाकिस्तान से अलग होकर भारत के साथ जुड़ने की मांग कर रही हैं।
PoK की जानी-मानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रानीमा शज़मा ने एक वीडियो पोस्ट करके कहा कि जिस तरह पाकिस्तानी सेना घरों को लूट रही है और आम नागरिकों को निशाना बना रही है, उसे देखते हुए PoK के लोगों के लिए भारत के साथ हाथ मिलाना बेहतर होगा। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि पाकिस्तान कभी भी PoK के साथ खड़ा नहीं रहा है और न ही कभी खड़ा होगा।
PoK में ज़बरदस्त विरोध-प्रदर्शन
PoK में प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी नियंत्रण के ख़िलाफ़ आवाज़ उठा रहे हैं। अवामी एक्शन कमेटी के सदस्य सरदार अमान खान ने 50,000 प्रदर्शनकारियों की भीड़ से कहा कि पाकिस्तानी सेना को कश्मीर छोड़ देना चाहिए क्योंकि वे इस इलाके के लिए कुछ भी करने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने मांग की कि कश्मीर को कश्मीरियों के हवाले कर दिया जाए और इस इलाके व भारत को आपस में मामले सुलझाने दिए जाएं। उन्होंने आगे कहा कि PoK के लोग पाकिस्तानी सरकार और ISI द्वारा शरणार्थी निर्वाचन क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने के लिए नियुक्त किए गए 12 विधायकों और चुनावी धांधली से चुने गए 41 विधायकों को स्वीकार नहीं करते हैं।
पाकिस्तानी सरकार और सेना की निंदनीय हरकतें
PoK में विरोध-प्रदर्शनों को दबाने के लिए पाकिस्तानी सरकार और सेना इलाके में खाने-पीने की चीज़ों की कमी पैदा करने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं जिनमें अनाज से भरे ट्रक दस दिनों से पाकिस्तान और PoK की सीमा पर फंसे हुए हैं; पाकिस्तानी सेना इन गाड़ियों को इलाके में घुसने से रोक रही है।
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PoK में 16 दिनों से पूरी तरह बंद (शटडाउन)
पूरा PoK इलाका पिछले 16 दिनों से पूरी तरह बंद है और लोग रावलकोट में विरोध-प्रदर्शन करने के लिए अपने घरों से बाहर निकल रहे हैं। पाकिस्तानी सरकार इस विद्रोह को दबाने की हर मुमकिन कोशिश कर रही है। पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में कठपुतली सरकार ने विद्रोह में शामिल होने के कारण 128 सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। अब तक इस आंदोलन में 58 लोगों की जान जा चुकी है। पाकिस्तानी सेना ने 150 से ज़्यादा लोगों को आतंकवादी घोषित किया है।



