कौन सी ताकतें भारत के न्यूक्लियर हथियारों की सुरक्षा करती हैं, जानें देश के न्यूक्लियर पावर प्लांट कहां कहां

protect india nuclear weapons: US, इज़राइल और ईरान के बीच तनाव की वजह से न्यूक्लियर हथियार और न्यूक्लियर एनर्जी सिक्योरिटी का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। US ने यह कार्रवाई यह आरोप लगाते हुए की है कि ईरान चुपके से न्यूक्लियर हथियार बना रहा है। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि भारत जैसे न्यूक्लियर संपन्न देश में न्यूक्लियर हथियार और न्यूक्लियर एनर्जी प्रोजेक्ट कैसे सुरक्षित रहते हैं।

भारत में न्यूक्लियर पावर प्लांट और न्यूक्लियर हथियारों की सिक्योरिटी के लिए एक मल्टी-लेयर्ड सिक्योरिटी सिस्टम बनाया गया है। इसमें सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF), स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड के साथ-साथ कई तरह के इंटेलिजेंस और टेक्निकल सिस्टम शामिल हैं। IB और RAW जैसी इंटेलिजेंस एजेंसियां ​​लगातार जानकारी शेयर करती रहती हैं।

CISF का होता है अहम योगदान

भारत सरकार ने 1969 में पब्लिक सेक्टर कंपनियों की सिक्योरिटी के लिए CISF की स्थापना की थी। 10 मार्च, 2026 को इस फोर्स ने अपना 57 साल का सफ़र पूरा किया। समय के साथ इस फोर्स की ज़िम्मेदारियां काफी बढ़ गई हैं। अभी, CISF देश के सभी एयरपोर्ट, मेट्रो सर्विस, सीपोर्ट के साथ-साथ कई ज़रूरी इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट की सिक्योरिटी के लिए ज़िम्मेदार है। अभी, इस फोर्स में करीब 1.90 लाख लोग और ऑफिसर काम कर रहे हैं। CISF न्यूक्लियर पावर प्लांट की सिक्योरिटी में भी अहम रोल निभाता है।

भारत का न्यूक्लियर सिक्योरिटी सिस्टम कैसा है?

चूंकि भारत एक न्यूक्लियर पावर वाला देश है, इसलिए न्यूक्लियर पावर प्लांट और न्यूक्लियर हथियारों की सिक्योरिटी बहुत ज़रूरी मानी जाती है। देश ने इसके लिए एक मल्टी-लेवल सिक्योरिटी सिस्टम बनाया है।

CISF मुख्य रूप से भारत के न्यूक्लियर पावर प्लांट और रिसर्च सेंटर की सिक्योरिटी के लिए ज़िम्मेदार है। यह पैरामिलिट्री फोर्स, जो मिनिस्ट्री ऑफ़ होम अफेयर्स के अधिकार क्षेत्र में आती है, न्यूक्लियर साइट्स के लिए खास तौर पर ट्रेंड यूनिट तैनात करती है। इन लोगों को एडवांस्ड हथियार, CCTV सिस्टम, बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल, मोशन सेंसर और नाइट विज़न डिवाइस इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी जाती है। वे संदिग्ध हरकतों पर लगातार नज़र रखने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं।

SFC: न्यूक्लियर हथियारों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी

न्यूक्लियर हथियारों का कंट्रोल और सुरक्षा स्ट्रेटेजिक फोर्सेज़ कमांड (SFC) की ज़िम्मेदारी है। यह इंडियन आर्मी, नेवी और एयर फ़ोर्स के अधिकारियों की एक जॉइंट फ़ोर्स है। न्यूक्लियर हथियारों का इस्तेमाल सिर्फ़ प्रधानमंत्री की हेड वाली न्यूक्लियर कमांड अथॉरिटी के ऑर्डर के बाद ही किया जा सकता है। SFC के स्पेशल कमांडो न्यूक्लियर हथियारों के स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन और डिप्लॉयमेंट के दौरान कड़े सुरक्षा इंतज़ाम करते हैं।

भारत के बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट

  • तारापुर न्यूक्लियर पावर प्लांट (महाराष्ट्र) – भारत का सबसे पुराना न्यूक्लियर पावर प्लांट।
  • रावतभाटा न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट (राजस्थान) – देश के ज़रूरी पावर प्लांट में से एक।
  • कलपक्कम (तमिलनाडु) – मद्रास एटॉमिक पावर स्टेशन और इंदिरा गांधी एटॉमिक रिसर्च सेंटर का घर।
  • नरोरा (उत्तर प्रदेश) – गंगा नदी के किनारे बना एक सेंसिटिव न्यूक्लियर पावर प्लांट।
  • काकरापार (गुजरात) – पश्चिमी भारत का बड़ा पावर प्लांट। कैगा (कर्नाटक) – घने जंगल वाले इलाके की वजह से खास सिक्योरिटी इंतज़ाम।
  • कुडनकुलम (तमिलनाडु) – भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट में से एक।
  • इन सभी प्लांट में CISF की बड़ी सिक्योरिटी तैनात है।

इमरजेंसी के लिए खास तैयारी

न्यूक्लियर पावर प्लांट पर न सिर्फ आतंकवादी हमलों का खतरा रहता है, बल्कि प्राकृतिक आपदाओं या टेक्निकल खराबी का भी खतरा रहता है। ऐसे हालात से निपटने के लिए, नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) को खास तौर पर ट्रेनिंग दी जाती है। यह फोर्स केमिकल, बायोलॉजिकल, रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर (CBRN) खतरों से निपटने में काबिल है। सभी न्यूक्लियर पावर प्लांट में रेगुलर मॉक ड्रिल भी की जाती हैं।

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न्यूक्लियर हथियारों की तैनाती और भारत की पॉलिसी

भारत ‘नो फर्स्ट यूज़’ की न्यूक्लियर वेपन पॉलिसी को फॉलो करता है। इसका मतलब है कि भारत पहले न्यूक्लियर हमला नहीं करेगा। न्यूक्लियर हथियारों की सही जगहें बहुत कॉन्फिडेंशियल रखी जाती हैं और उन्हें ज़्यादातर सुरक्षित अंडरग्राउंड जगहों पर स्टोर किया जाता है। भारत के पास न्यूक्लियर ट्रायड कैपेबिलिटी है। यानी, ज़मीन, हवा और समुद्र से न्यूक्लियर हथियार लॉन्च करने की काबिलियत। खास तौर पर, INS अरिहंत जैसी न्यूक्लियर पावर वाली सबमरीन को समुद्र में न्यूक्लियर हथियारों की सुरक्षित तैनाती के लिए बहुत ज़रूरी माना जाता है।

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