भारत में शुरू हुआ ब्रिक्स का महामंच: एंट्री के लिए हाथ-पैर मार रहा PAK; इस पॉवर ने रोके रखा

Pakistan BRICS Membership Application: भारत की मेजबानी में वैश्विक मंच पर ब्रिक्स (BRICS) का महासम्मेलन आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुका है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में हिस्सा लेने के लिए दुनिया के प्रमुख देशों के प्रतिनिधि और शीर्ष नेता भारत की धरती पर पहुंच चुके हैं।
सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई, जिसने दोनों देशों के कूटनीतिक और रणनीतिक रिश्तों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। ब्रिक्स समूह के विस्तार पर नजर डालें तो मूल सदस्य देशों—भारत, ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका—के साथ पिछले वर्ष मिस्र (इजिप्ट), इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी इसका पूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। मगर इस पूरी हलचल के बीच एक पड़ोसी मुल्क ऐसा है जो इस ताकतवर ब्लॉक में एंट्री पाने के लिए लगातार तड़प रहा है, और वह है पाकिस्तान।
कंगाली से जूझता पाकिस्तान: ब्रिक्स में एंट्री के पीछे क्या है मजबूरी?
पाकिस्तान उन 29 देशों की कतार में खड़ा है जिन्होंने ब्रिक्स की सदस्यता हासिल करने के लिए औपचारिक अर्जी लगा रखी है। साल 2023 से ही पाकिस्तान का यह आवेदन ठंडे बस्ते में पड़ा है, क्योंकि भारत ने अपने कड़े रुख और वीटो के जरिए उसकी एंट्री पर ब्रेक लगा रखा है। अपनी डगमगाती अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए पाकिस्तान हर हाल में ब्रिक्स का हिस्सा बनना चाहता है। पाकिस्तान आर्थिक सर्वेक्षण के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश की जीडीपी ग्रोथ रेट महज 3.70 प्रतिशत पर सिमट कर रह गई है। निक्केई एशिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान वर्ल्ड बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज जाल से निकलने और अपने वित्तीय विकल्पों को विविधता देने के लिए ब्रिक्स समर्थित न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) में 580 मिलियन डॉलर का शेयर तक खरीद चुका है।
ग्लोबल साउथ का सिरमौर बना ब्रिक्स: 40% वैश्विक जीडीपी पर कब्जा
इस्लामाबाद ने ब्रिक्स का दरवाजा तब खटखटाया जब यह ब्लॉक ग्लोबल साउथ की सबसे बुलंद आवाज बनकर उभरा। मौजूदा समय में ब्रिक्स समूह पूरी दुनिया की लगभग 49 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में 40 फीसदी की विशाल हिस्सेदारी रखता है। खुद भारत का व्यापार भी ब्रिक्स ब्लॉक के साथ अभूतपूर्व गति से बढ़ा है; समूह के भीतर भारतीय निर्यात 48.8 प्रतिशत की छलांग लगाकर 64.3 बिलियन अमेरिकी डॉलर से सीधे 95.7 बिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच चुका है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की दलीलें और बहुपक्षवाद का राग
नवंबर 2023 में पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलोच ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्रिक्स को विकासशील देशों का सबसे अहम मंच बताते हुए सदस्यता के औपचारिक आवेदन की पुष्टि की थी। उन्होंने दावा किया था कि पाकिस्तान के अधिकतर ब्रिक्स सदस्यों के साथ सौहार्दपूर्ण रिश्ते हैं और ब्लॉक में शामिल होकर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सहयोग और समावेशी बहुपक्षवाद को नई ऊर्जा दे सकता है। प्रवक्ता ने यह उम्मीद भी जताई थी कि ब्रिक्स देश पाकिस्तान के आवेदन पर सकारात्मक रुख अपनाएंगे।
ट्रंप ने कनाडा पर ठोका 50% टैरिफ, जवाब में कनाडा ने की ये कार्रवाई
चीन-रूस की पैरवी भी फेल: भारत की एक ‘ना’ ने रोकी पाकिस्तान की गाड़ी
रूस में पाकिस्तान के राजदूत मोहम्मद खालिद जमाली ने रूसी समाचार एजेंसी ‘तास’ (TASS) को दिए इंटरव्यू में स्वीकार किया था कि पाकिस्तान समर्थन जुटाने के लिए सदस्य देशों से लगातार गुहार लगा रहा है और मॉस्को के साथ भी गहन संपर्क में है। बीजिंग और मॉस्को से सहानुभूति मिलने के बावजूद पाकिस्तान की सदस्यता की राह में भारत एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ा है। ब्रिक्स के कड़े नियमों के तहत किसी भी नए देश को पूर्ण सदस्य या साझेदार का दर्जा तभी मिल सकता है जब सभी मौजूदा सदस्य सर्वसम्मति से उस पर मुहर लगाएं। ऐसे में भारत के वीटो पॉवर के सामने पाकिस्तान की हर कूटनीतिक चाल बेअसर साबित हो रही है।



