एक ही महीने में 44 लाख से ज़्यादा SIP बंद, वजह आपको हैरान कर देगी

पिछले कुछ वर्षों में म्यूचुअल फंड SIP निवेश का सबसे आसान और विश्वसनीय तरीका बन गया है। हर महीने थोड़ी-थोड़ी रकम निवेश करके बड़ा फंड बनाने की सुविधा ने लाखों लोगों को आकर्षित किया है। हालाँकि, ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, अब स्थिति बदल रही है। बड़ी संख्या में निवेशक अपनी एसआईपी बंद कर रहे हैं।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2025 में 44.03 लाख एसआईपी बंद हुए। अगस्त महीने में यह आँकड़ा 41.15 लाख था, यानी एक महीने में बंद होने वाली एसआईपी की संख्या में 7% की वृद्धि हुई है।
साल 2024 के इसी महीने में लगभग 40 लाख एसआईपी बंद हुए थे। यह रुझान दर्शाता है कि निवेशक अब अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार कर रहे हैं। एसआईपी बंद करने के पीछे केवल बाजार में उतार-चढ़ाव ही नहीं, बल्कि कई रणनीतिक और व्यक्तिगत कारण भी हैं।
कई निवेशक जोखिम कम करने और बेहतर रिटर्न पाने के लिए एक बड़ी SIP के बजाय अपने निवेश को कई छोटी SIP में बाँटना पसंद करते हैं। इसके लिए उन्हें पुरानी SIP बंद करके नई रणनीति अपनानी पड़ती है।
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कुछ समय बाद निवेशकों को एहसास होता है कि उन्होंने जो फंड चुना है, वह उनके वित्तीय लक्ष्यों या जोखिम उठाने की क्षमता से मेल नहीं खाता। ऐसी स्थिति में SIP बंद करके, एक व्यवस्थित ट्रांसफर प्लान के ज़रिए किसी बेहतर फंड में रकम ट्रांसफर करना उचित होता है।
अगर किसी सेक्टर-आधारित फंड का प्रदर्शन लंबे समय तक खराब रहता है, तो उसमें SIP जारी रखना नुकसानदेह हो सकता है। ऐसे में निवेशक व्यापक बाज़ार या लार्ज-कैप फंड चुनना पसंद करते हैं।
कुछ लोग इस वजह से भी बंद कर देते हैं SIP
नौकरी छूटने, इलाज के खर्च या परिवार की अन्य आर्थिक तंगी के कारण कई लोग अपनी SIP बंद करने पर मजबूर हो जाते हैं। ऐसे में उनकी प्राथमिकता तुरंत धन की व्यवस्था करना होती है।
अक्सर कहा जाता है कि SIP कभी बंद नहीं करना चाहिए। हालाँकि, विशेषज्ञ इस दृष्टिकोण से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि एसआईपी बंद करना हमेशा एक ‘बुरा फैसला’ नहीं होता। यह फैसला पूरी तरह से ज़रूरत और ठोस वित्तीय सलाह पर आधारित होना चाहिए। निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की नियमित समीक्षा करनी चाहिए और ज़रूरत के अनुसार रणनीतिक बदलाव करने चाहिए।



