जेल से सीधा RAW का एजेंट, जसकिरत सिंह के ‘हमजा’ बनने की खौफनाक दास्तां जानें

jaskirat singh rangi real story: फिल्म धुरंधर: द रिवेंज सिर्फ एक एक्शन थ्रिलर नहीं है, बल्कि यह दर्शकों को भावनात्मक स्तर पर भी झकझोर देती है। रणवीर सिंह ने इसमें दोहरी भूमिका निभाकर कहानी को और गहराई दी है। फिल्म की कहानी एक ऐसे युवक के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हालात के चलते अपराध और देशभक्ति के बीच फंस जाता है। यह फिल्म ‘धुरंधर’ सीरीज की दूसरी कड़ी है, जिसे पांच भाषाओं में रिलीज किया गया है। इससे पहले आई फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी।
एक आम युवक से बदले की आग तक
जसकिरत सिंह रंगी की जिंदगी शुरुआत में बिल्कुल सामान्य थी। वह 21 साल की उम्र में भारतीय सेना में जाने का सपना देख रहा था। उसका परिवार पठानकोट में रहता था और उसके पिता सेना में अधिकारी थे। मगर जमीन और पैसों के विवाद ने उसकी जिंदगी बदल दी।
इस विवाद में उसके पिता की हत्या कर दी गई। उसकी एक बहन के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ और उसे मार दिया गया। दूसरी बहन भी हिंसा का शिकार हुई मगर किसी तरह बच गई। इस मामले में आरोपी एक प्रभावशाली परिवार से थे, इसलिए कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही वह मोड़ था, जहां जसकिरत का सिस्टम से भरोसा खत्म हो गया।
अपराध से खुफिया एजेंसी तक का सफर
न्याय न मिलने पर जसकिरत ने खुद बदला लेने का फैसला किया। उसने एक दोस्त की मदद से हथियार जुटाए और एक रात विधायक के घर हमला कर दिया, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद उसे गिरफ्तार किया गया और अदालत ने उसे मौत की सजा सुनाई।
जेल में उसकी मुलाकात अजय सान्याल नाम के एक रॉ अधिकारी से होती है। यहीं से उसकी जिंदगी एक नया मोड़ लेती है। अजय उसे एक गुप्त मिशन के लिए चुनता है और उसे जेल से बाहर निकालने की योजना बनती है।
नई पहचान और खतरनाक मिशन
जेल से बाहर आने के बाद जसकिरत को कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। उसे एक नई पहचान दी जाती है और वह हमजा अली मजारी बन जाता है। इस पहचान के साथ उसे पाकिस्तान में घुसकर आतंकवादी संगठनों के बीच काम करना होता है।
पहली फिल्म में उसके इसी मिशन को दिखाया गया था। रणवीर सिंह ने इस किरदार में दर्द और संघर्ष को प्रभावी ढंग से पेश किया है, जिससे दर्शक उससे जुड़ाव महसूस करते हैं।
जानें फिल्म के आखिर में क्या होता है
फिल्म के अंत में हमजा अपना मिशन पूरा करके भारत लौट आता है। मगर उसकी निजी जिंदगी पीछे छूट जाती है। वह अपनी पत्नी यालिना और बेटे ज़ायन को छोड़ देता है।
भारत लौटने के बाद जब वह अपनी असली पहचान में वापस आता है, तो अपनी मां से मिलने का मन बनाता है। वह अपने परिवार को दूर से देखता है मगर उनसे मिल नहीं पाता। उसे अपने प्रशिक्षण के दौरान सीखी बात याद आती है कि त्याग ही सबसे बड़ा कर्तव्य है।
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आखिर में वह बिना मिले ही लौट जाता है, क्योंकि उसके परिवार के लिए वह पहले ही मर चुका होता है। फिल्म का अंतिम दृश्य उसे फिर से सैन्य प्रशिक्षण लेते हुए दिखाता है, जो उसके अधूरे सफर को दर्शाता है।


