israel news in hindi: भारत का इज़राइल पर बड़ा एहसान!

भारत ने 100 साल पहले इजरायली शहर हाइफा को ओटोमन शासन से आज़ाद कराया था। जानिए इस वीरता से भरे युद्ध की पूरी कहानी।

israel news in hindi: भारत इजरायल का बहुत बड़ा ऋणी है। भारत ने 100 साल पहले इजरायली शहर हाइफा को तुर्कों से आज़ाद कराया था। israel ने ओटोमन शासन से इजरायल को आज़ाद कराने में भारतीय सैनिकों की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।

सोमवार को हाइफा नगरपालिका अधिकारियों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान हाइफा के युद्ध में बहादुरी से लड़ने वाले भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। ये कार्यक्रम हाइफा युद्ध की 107वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में israel स्थित भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में आयोजित किए गए थे।

हाइफा के मेयर की घोषणा (Haifa news in hindi)

यहूदी देश israel स्थित हाइफा के मेयर योना याहाव ने घोषणा की कि इस तथ्य को सामने लाने के लिए स्थानीय स्कूलों के इतिहास पाठ्यक्रम में बदलाव किए जाएँगे। पाठ्यपुस्तकों में यह लिखा होगा कि हाइफा को आज़ाद कराने वाले अंग्रेज़ नहीं, बल्कि भारतीय सैनिक थे।

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योना याहाव शहीद सैनिकों की बहादुरी को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित एक समारोह में बोल रहे थे। “मैं इसी शहर में पैदा हुआ और यहीं से स्नातक हुआ। वर्षों तक हमें यही पढ़ाया जाता रहा कि हाइफा को अंग्रेजों ने आज़ाद कराया था। एक दिन ऐतिहासिक सोसायटी के एक सदस्य मेरे घर आए और कहा कि व्यापक शोध से यह साबित हो गया है कि हाइफा को ओटोमन साम्राज्य से आज़ाद कराने वाले अंग्रेज़ नहीं, बल्कि भारतीय सैनिक थे।

ये युद्ध क्यों यादगार (Why is the Battle of Haifa israel memorable)

हाइफा का युद्ध अब इतिहास के अंतिम महान घुड़सवार अभियानों में से एक माना जाता है। भालों और तलवारों से लैस भारतीय रेजिमेंटों ने माउंट कार्मेल की ऊँची पहाड़ियों पर धावा बोलकर ओटोमन सेना को परास्त कर दिया। भारी कठिनाइयों के बावजूद, उन्होंने पूरे शहर को सुरक्षित कर लिया। इस वीरतापूर्ण अभियान को उसकी असाधारण बहादुरी और रणनीतिक प्रभावशीलता के लिए याद किया जाता है।

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हाइफा का युद्ध 23 सितंबर 1918 को लड़ा गया था। इस युद्ध में राजपूत सेना का नेतृत्व जोधपुर रियासत के सेनापति मेजर दलपत सिंह ने किया था। अंग्रेजों ने जोधपुर रियासत को हाइफा पर कब्ज़ा करने का निर्देश दिया था। यह आदेश मिलते ही दलपत सिंह और उनकी सेना ने दुश्मन पर हमला बोल दिया। सेना ने अपनी पारंपरिक युद्ध शैली का इस्तेमाल करते हुए, दुश्मन के तोपखाने, राइफलों और मशीनगनों का सामना करते हुए बहादुरी से लड़ाई लड़ी। विजय। इस युद्ध में जोधपुर सेना के लगभग 900 सैनिक शहीद हुए। अंततः, विजय भारतीयों की हुई जिन्होंने हाइफा पर कब्ज़ा कर लिया। इस प्रकार 400 साल पुराने ओटोमन साम्राज्य का अंत हो गया, जो उनके नियंत्रण में था।

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न्यूज़ऑनएयर की एक रिपोर्ट के अनुसार, israel में भारतीय राजदूत जे.पी. सिंह ने कहा कि किसी घुड़सवार सेना द्वारा इतनी जल्दी किसी किलेबंद शहर पर कब्ज़ा करने का यह एकमात्र रिकॉर्ड है। उन्होंने याद दिलाया कि प्रथम विश्व युद्ध में 74,000 से ज़्यादा भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गंवाई, जिनमें से 4,000 से ज़्यादा पश्चिम एशिया में शहीद हुए।

दोनों देशों के बढ़ी दोस्ती (israel india relation news in hindi)

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इस समारोह में तत्कालीन जोधपुर, मैसूर और हैदराबाद लांसर्स के भारतीय सैनिकों के साहस और वीरता को सम्मानित किया गया, जिन्होंने 1918 में हाइफा को आज़ाद कराया था। इस समारोह में राजदूत जे.पी. सिंह और हाइफा के मेयर योना याहव जैसे गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। israel स्थित भारतीय दूतावास ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि भारतीय सैनिकों द्वारा अपनी भूमि के लिए दिया गया बलिदान एक विरासत है जो भारत और israel के बीच मैत्री के अटूट बंधन को मज़बूत करता है।

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