Iranian economic crisis 2026: ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात, क्या खामनेई भी होंगे सत्ता से बेदखल
Iranian economic crisis 2026: तानाशाह मुर्दाबाद…। तानाशाह मुर्दाबाद…। इस्लामिक देश ईरान की सड़कों पर उमड़ी युवाओं की भीड़ आजकल नारों के जरिए अपना आक्रोश जाहिर कर रही है। जगह-जगह यातायात जाम कर बवाल मच रहा है। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में आधा दर्जन से अधिक नागरिकों की मौत हो चुकी है। बिगड़े हालात की वजह से सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। सरकारी कामकाज पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है।
खराब अर्थव्यवस्था, बढ़ती महंगाई व गहराते मुद्रा संकट ने ईरान में विद्रोह की आग को भड़का दिया है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई के सामने एक बार फिर सत्ता बचाने की चुनौती है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों ने ईरान की माली हालत खराब कर दी है। दैनिक जरूरत की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में आम नागरिक के लिए जीवन यापन बेहद कष्टदायी हो चुका है।
ईरान लंबे समय से आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करने को मजबूर है। नई पीढ़ी नए तौर-तरीकों से जीवन जीने की स्वतंत्रता चाहती है, मगर सुप्रीम लीडर खामनेई और विभिन्न कट्टरपंथी संगठन इस प्रकार की छूट देने के पक्ष में नहीं हैं। ईरान में कुछ साल पहले हिजाब विरोधी मुहिम भी देखने को मिली थी। अमेरिका और इजरायल जैसे देशों ने भी ईरान की मुसीबत बढ़ा रखी है। अमेरिका कोई न कोई ऐसा कदम उठाता रहा है, जिससे तेहरान को नए संकट से जूझना पड़ता है। ईरान में रजा पहलवी के समर्थन में आवाजें उठ रही हैं।
छियालीस साल पहले इस्लामिक क्रांति में अपदस्थ किए गए शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा फिलहाल अमेरिका में रह रहे हैं। रजा पहलवी ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान में भड़के आंदोलन को समर्थन दे दिया है।
तेहरान में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कई हजार विद्यार्थियों ने नववर्ष के पहले दिन जिस प्रकार से सुप्रीम लीडर के विरोध में आवाज बुलंद की, वह अप्रत्याशित है। क्या ईरान में ‘जैन जेड’ नया इतिहास रचने की ओर अग्रसर है? यह सवाल समूची दुनिया में उठ रहा है। दरअसल पिछले कुछ साल में जैन जेड की ताकत ने कई देशों में सत्ता को उखाड़ फेंका है।
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श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में यह परिवर्तन देखा जा चुका है। नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली तथा बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना इन दिनों दूसरे मुल्कों में शरण लेने को मजबूर हैं। जानकारों का मानना है कि ईरान में यदि हालात जल्द सामान्य नहीं हो पाते हैं तो सुप्रीम लीडर खामनेई को भी सत्ता से बेदखल होना पड़ सकता है। नेपाल और बांग्लादेश में अब तक परिस्थितियां सामान्य नहीं हो पाई हैं।
ईरान में विद्रोह के पीछे कौन
यह भी संभव है कि ईरान में विद्रोह की चिंगारी भड़काने में अमेरिका का हाथ हो। चूंकि दुश्मन देशों में सत्ता परिवर्तन कराने के लिए अमेरिका पहले से बदनाम है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि तेहरान सरकार ने दशकों से देश की अर्थव्यवस्था, खेती, पानी और बिजली जैसे बुनियादी मुद्दों को नजरअंदाज किया है। इसके बजाय अरबों डॉलर आतंकी संगठनों और परमाणु हथियारों के शोध पर खर्च किए गए।
वही ईरान में फैली अशांति पर समूची दुनिया की पैनी नजर है। जन विद्रोह की आग को बुझाने में सुप्रीम लीडर खामनेई कितने सफल हो पाते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे ईरान में अगर सत्ता परिवर्तन होता है तो अमेरिका की लॉटरी लग जाएगी। खामनेई को सत्ता से हटता देखने को वह बेताब नजर आ रहा है।



