खारजा झाल में बेखौफ हो रहा प्रतिबंधित मत्स्याखेट: जिम्मेदार मौन

यमुना नदी के ठेके की आड़ में प्रतिबंधित क्षेत्र में जाल डालने का आरोप, हर महीने लाखों की मछलियों का शिकार

जसवंतनगर,इटावा। बलरई थाना क्षेत्र से गुजरने वाली खारजा झाल में न्यायालय द्वारा मत्स्याखेट के लिए प्रतिबंधित है उसके बाद खारजा झाल क्षेत्र में कथित तौर पर खुलेआम मछलियों का शिकार किया जा रहा है। आरोप है कि यमुना नदी में मत्स्याखेट का ठेका लेने वाले लोग ठेके की आड़ में प्रतिबंधित क्षेत्र में दिन-रात जाल डालकर मछलियां पकड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार हो रहे अवैध मत्स्याखेट के बावजूद संबंधित विभागों और स्थानीय पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

मत्स्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष यमुना नदी में मछली पकड़ने का ठेका आगरा क्षेत्र की ओर से जारी किया गया है। बॉर्डर क्षेत्र होने के कारण ठेके का बंटवारा एक-एक वर्ष के अंतराल पर आगरा और इटावा के बीच होता है। स्थानीय लोगों आलोक, मोहन, दीपक, राजू, सुभाष, बबलू, राधेश्याम, दिनेश और विवेक आदि का आरोप है कि ठेकेदार सुरेंद्र सिंह उर्फ राजा और रंजीत निर्धारित यमुना नदी क्षेत्र के बजाय प्रतिबंधित खारजा झाल में जाल लगाकर बड़े पैमाने पर मछलियों का शिकार कर रहे हैं।

हर महीने लाखों रुपये की मछलियों का कारोबार

स्थानीय लोगों के मुताबिक प्रतिबंधित क्षेत्र से लगातार मछलियां पकड़कर बाजार में बेची जा रही हैं। इससे हर महीने लाखों रुपये के कारोबार का आरोप लगाया जा रहा है। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर संबंधित अधिकारियों तक महीनेदारी पहुंचने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

जांच कराकर होगी कार्रवाई

सिंचाई विभाग के जिलेदार आशीष तिवारी ने बताया कि उन्हें पहले इस मामले की जानकारी नहीं थी। अब मामला संज्ञान में आया है तो जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से मछली का शिकार करने वालों के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत कराया जाएगा।

अब देखना यह है कि संबंधित विभाग प्रतिबंधित खारजा झाल को अवैध मत्स्याखेट से कब मुक्त करा पाते हैं और आरोपों के आधार पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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