UP के इस जिले में 14 लाख चालान और 243 करोड़ का जुर्माना, फिर भी सुधरने को तैयार नहीं लोग

Highest Challans in UP: न पुलिस का डर, ना चालान कटने की चिंता। जान बेशक चली जाए, मगर सुरक्षा नियमों का पालन कतई नहीं करेंगे। जी हां ! देश की राजधानी से सटे गाजियाबाद जिले में यातायात नियमों को ठेंगा दिखाना आम बात हो गई है। वाहन चालकों पर यातायात पुलिस की सख्ती का वैसा असर देखने को नहीं मिलता, जिसकी उम्मीद की जाती रही है।

सड़क सुरक्षा नियमों का खुलेआम मखौल उड़ाने में दोपहिया वाहन चालक सबसे आगे हैं। समय के साथ ट्रैफिक पुलिस के कामकाज का तरीका बदला है। यह महकमा भी आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहा है। मुख्य तिराहों, चौराहों एवं मार्गों पर उच्च क्वालिटी के कैमरे लगा दिए गए हैं। सड़कों पर चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस की टीम मोबाइल के जरिए लापरवाह वाहन चालकों के ऑनलाइन चालान खूब काट रही है। इसके बावजूद बिगड़ी आदत में आशाजनक सुधार नहीं आया है।

चालान के आंकड़े आपको कर देंगे हैरान

आंकड़े बताते हैं कि गाजियाबाद में ट्रैफिक पुलिस ने पिछले साल चालान काटने में कोई कंजूसी नहीं की। 14 लाख 42 हजार 525 चालान किए गए। इन चालान की एवज में रिकॉर्ड 243 करोड़ रुपए का जुर्माना निर्धारित किया गया। यह आंकड़े इस बात की तस्दीक करने के लिए पर्याप्त हैं कि वाहन चलाते समय नागरिक यमराज को चुनौती देने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में दोपहिया वाहन चालक व साथी के लिए हेलमेट अनिवार्य हो चुका है, मगर इस नियम को स्कूटी, बाइक आदि के चालक मानने को तैयार नहीं हैं। चूंकि चौदह लाख में से सर्वाधिक 6 लाख 91 हजार चालान सिर्फ बिना हेलमेट वाहन चलाने पर किए गए हैं। आंकड़े (Uttar Pradesh challan statistics) बताते हैं कि पिछले साल सड़क हादसों में कुल चार सौ नागरिकों को जान गंवानी पड़ी है।

निश्चित रूप से इनमें से कई व्यक्ति ऐसे रहे होंगे, जिनकी कोई गलत नहीं होगी, मगर दूसरे वाहन चालक की लापरवाही का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा होगा। इसमें दो राय नहीं कि गाजियाबाद की आबादी पहले के मुकाबले काफी बढ़ चुकी है। सैकड़ों नई आवासीय कॉलोनियां अस्तित्व में आई हैं। जहां विभिन्न जिले के बाहर और विभिन्न राज्यों के परिवार भी बड़ी संख्या में आकर बस चुके हैं।

औद्योगिक नगरी होने के नाते गाजियाबाद में श्रमिक वर्ग की संख्या भी अच्छी खासी है। इसके चलते छोटे-बड़े वाहनों का प्रयोग बढ़ा है। इसके अतिरिक्त फ्लोटिंग आबादी अलग है। सवाल यह कि क्या सिर्फ रिकॉर्ड चालान काटने से ट्रैफिक रूल्स तोड़ने के मामलों में कमी आ जाएगी। जवाब ना में होगा। चूंकि बगैर हेलमेट दोपहिया वाहन अधिकांश ऐसे चालक चलाते हैं जो या तो नाबालिग हैं या हेलमेट लगाना ही नहीं चाहते। बार-बार चालान होने के बाद भी वह नहीं सुधरते।

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अलबत्ता यातायात नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने के अलावा लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ कुछ ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, जो उनके भीतर डर पैदा कर सकें।

देश के विभिन्न हिस्सों में अक्सर नाबालिग चालक द्वारा वाहन चलाए जाने की वजह से जानलेवा हादसे होते रहते हैं। इन घटनाओं पर हो-हल्ला मचता है, पुलिस कार्रवाई भी करती है, मगर स्थिति जस की तस रहती है। बढ़ते सड़क हादसे वाकई चिंता का विषय हैं। जिन्हें रोकने के लिए समाज को आगे आने की आवश्यकता है। यातायात पुलिस के भरोसे रहकर इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। नतीजन पुलिस और पब्लिक को एक मंच पर आकर जरूरी मंथन करना चाहिए।

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