Gen z protests: नेपाल, इंडोनेशिया के बाद अब इस देश में, युवा सड़कों पर उतरे

Gen z protests: नेपाल, पेरू, इंडोनेशिया और अन्य देशों में तेजी से बढ़ रहे हैं। भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर युवा सड़कों पर उतर आए हैं।

Gen z protests: कुछ दिन पहले नेपाल में युवाओं ने ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। देश की सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरे युवाओं के इस विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। इसके बाद यह विरोध प्रदर्शन भड़क गया और देश के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा।

नेपाल सरकार ने सोशल मीडिया पर बैन लगा दिया था। इसके बाद Gen Z ने खफा होकर पूरे देश में protests शुरू कर दिया। समय के साथ यह विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। इसमें सरकारी कार्यालयों और प्रधानमंत्री आवास में आगजनी भी शामिल थी। अंततः सरकार को अपना फ़ैसला वापस लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। मगर फिर भी विरोध प्रदर्शन शांत नहीं हुआ।

कई देशों में देखे गए युवाओं के विरोध प्रदर्शन (Generation Z Movement)

बांग्लादेश और नेपाल की तरह इस साल भी Gen Z के विरोध प्रदर्शन कई देशों में देखे गए। नेपाल की तरह इंडोनेशिया में भी विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। अब पेरू में भी युवा सड़कों पर उतर आए हैं। 27 सितंबर को पेरू की राजधानी लीमा में हज़ारों युवाओं ने राष्ट्रपति दीना बोलुआटे के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी।

Gen z protests in peru

पेरू में हुए विरोध प्रदर्शन में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज किया। जवाब में युवाओं ने भी पत्थरबाज़ी शुरू कर दी। पेरू में यह विरोध प्रदर्शन 20 सितंबर को पेंशन व्यवस्था में किए गए बदलावों के बाद शुरू हुआ।

नए नियम के अनुसार पेरू में 18 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक व्यक्ति के लिए किसी न किसी पेंशन कंपनी से जुड़ा होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा राष्ट्रपति बोल्सोनारो और सांसदों के विरुद्ध जनता में लंबे समय से असंतोष व्याप्त है।

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वहीं बीते 31 अगस्त से 1 सितंबर तक इंडोनेशिया में युवाओं ने सड़कों पर उतरकर सांसदों के बढ़ते भत्तों के विरुद्ध आक्रामक प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन में 8 लोगों की मौत हो गई। इस विरोध प्रदर्शन के दबाव में राष्ट्रपति प्रबोवो ने सांसदों के आवास भत्ते रोकने का फैसला किया।

नीदरलैंड में भी युवाओं का विरोध प्रदर्शन ( Netherlands Gen z movement)

1 सितंबर को नीदरलैंड में भी युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। युवाओं ने सरकार पर इज़राइल की मदद करने का आरोप लगाते हुए अपना गुस्सा ज़ाहिर किया। युवा आंदोलन के बाद सरकार ने अपनी नीति बदलने का वादा किया। 8 से 13 सितंबर तक नेपाल में बड़े पैमाने पर युवाओं ने विरोध प्रदर्शन किए। उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के विरुद्ध संसद का घेराव किया और आग लगा दी। इन प्रदर्शनों में 72 लोग मारे गए और 2113 घायल हुए।

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10 सितंबर को फ्रांस में भी युवाओं ने बजट कटौती के विरोध में हड़ताल का आह्वान किया। इस विरोध प्रदर्शन में भी लाखों लोग सड़कों पर उतरे। वहाँ की अर्थव्यवस्था ठप हो गई। मगर सरकार ने अपनी नीति नहीं बदली। 15 से 17 सितंबर तक तिमोर-लेस्ते में जेनरेशन Z के प्रदर्शनकारियों ने सांसदों के लिए आजीवन पेंशन और कार योजना का विरोध किया। दबाव में सरकार को प्रस्ताव वापस लेना पड़ा जिसके परिणामस्वरूप युवा आंदोलन की जीत हुई।

21 सितंबर को फिलीपींस में बाढ़ नियंत्रण भ्रष्टाचार के विरुद्ध लगभग 100000 लोगों ने रैली निकाली। विरोध प्रदर्शनों के दौरान दो लोगों की मौत हो गई 205 घायल हुए और 216 अरेस्ट किए गए। दबाव में स्पीकर और सीनेट प्रमुख को इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।

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22 सितंबर को इटली में जेनरेशन Z के प्रदर्शनकारियों ने गाजा युद्ध के विरोध में रेल और बंदरगाह संचालन बाधित कर दिया। युवाओं में गुस्से की लहर फैल गई। 25 सितंबर को मेडागास्कर में बिजली और पानी की कमी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदर्शन हुए। इन प्रदर्शनों में पाँच लोगों की मौत हो गई जिससे युवाओं में गुस्सा भड़क उठा।

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