पिता की वो अधूरी ख्वाहिश, जिसे पूरा करने के चक्कर में बेटे ने डूबे दिए 137 करोड़

big budget flop: बॉलीवुड में अक्सर बड़े सपनों के साथ फिल्में बनती हैं, लेकिन हर सपना सफल नहीं होता। साल 2019 में आई फिल्म कलंक इसका एक उदाहरण है। इस फिल्म से दर्शकों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन रिलीज के बाद इसका असर वैसा नहीं रहा जैसा सोचा गया था।

दर्शकों की उम्मीदों पर क्यों खरा नहीं उतर पाई फिल्म

कलंक एक मल्टी-स्टारर फिल्म थी, जिसमें कई बड़े कलाकार नजर आए। इतनी बड़ी स्टारकास्ट होने के कारण लोगों को लगा था कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचाएगी। लेकिन कहानी और प्रस्तुति दर्शकों को ज्यादा प्रभावित नहीं कर सकी। यही वजह रही कि फिल्म टिकट खिड़की पर कमजोर साबित हुई।

एक अधूरा सपना जो सालों बाद पूरा हुआ

इस फिल्म की जड़ें काफी पुरानी हैं। निर्माता यश जौहर ने साल 2003 में इस कहानी को फिल्म बनाने का सपना देखा था। लेकिन 2004 में उनके निधन के बाद यह प्रोजेक्ट रुक गया। लंबे समय तक यह सपना अधूरा ही रहा।

16 साल बाद बनी फिल्म

करण जौहर के लिए इस फिल्म को बनाना आसान नहीं था। पिता के जाने के बाद वह इस विषय पर काम करने से हिचक रहे थे। लेकिन आखिरकार उन्होंने हिम्मत जुटाई और करीब 16 साल बाद इस प्रोजेक्ट को पूरा किया।

भावनाओं से जुड़ा था प्रोजेक्ट

धर्मा प्रोडक्शन के लिए कलंक सिर्फ एक फिल्म नहीं थी। यह करण जौहर के लिए उनके पिता की यादों से जुड़ा हुआ एक खास प्रोजेक्ट था। इसलिए इसमें उन्होंने पूरी मेहनत और संसाधन लगाए।

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बजट बड़ा, कमाई कम

फिल्म पर काफी पैसा खर्च किया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार इसका बजट लगभग 137 करोड़ रुपये था। हालांकि, भारत में यह फिल्म करीब 95.32 करोड़ रुपये ही कमा पाई। इस अंतर ने इसे बॉक्स ऑफिस पर असफल बना दिया।

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