अखिलेश यादव की सादगी: सड़क किनारे बुजुर्ग से खीले खरीदे, बचपन की यादें हुईं ताजा
अखिलेश यादव की सादगी: सैफई से लखनऊ लौटते समय सड़क किनारे बैठे एक बुजुर्ग से खीले खरीदकर बचपन की यादें ताज़ा कीं।

अखिलेश यादव की सादगी: सपा प्रमुख ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जननेता सिर्फ मंचों पर भाषण देने से नहीं बनते, बल्कि ज़मीन से जुड़े रहकर, लोगों के सुख-दुख में शामिल होकर ही असली नेता बना जाता है।
हाल ही में एक भावुक कर देने वाला दृश्य उस वक्त सामने आया जब सैफई से लखनऊ लौटते वक़्त अखिलेश यादव की नज़र सड़क किनारे बैठे एक बुजुर्ग खील विक्रेता पर पड़ी। गाड़ी रुकवाई गई और वो खुद बुजुर्ग के पास पहुंचे। उनका हालचाल जाना और फिर उनसे खीले भी खरीदे।
इस दौरान अखिलेश यादव ने मुस्कुराते हुए कहा कि आज खीले लेते वक्त बचपन की वो यादें ताज़ा हो गईं जब नेताजी (मुलायम सिंह यादव) त्योहारों पर घर के लिए खीले लाया करते थे। पूरा परिवार एक साथ बैठकर उन्हें खाता था। वो सादगी और अपनापन आज भी दिल में जिंदा है।
इस मुलाक़ात की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। जहां लोग अखिलेश यादव की ज़मीन से जुड़ी सोच और संवेदनशीलता की तारीफ कर रहे हैं।
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नेताजी मुलायम सिंह यादव को लोग आज भी इसलिए याद करते हैं क्योंकि वो सिर्फ नेता नहीं, परिवार का हिस्सा जैसे थे। चाहे होली हो या दीपावली, वह आम लोगों के बीच जाकर उनके साथ त्योहार मनाया करते थे। अब अखिलेश यादव भी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते नज़र आ रहे हैं।



