भारत-चीन पर शिकंजा कसने चला था अमेरिका, यूरोप ने बीच रास्ते छोड़ा साथ; ट्रंप को पीछे खींचने पड़े कदम!

India Russia Oil Trade 2026: रूस से रियायती दरों पर कच्चा तेल खरीदने के लिए भारत और चीन पर कड़े ‘सेकेंडरी प्रतिबंध’ (secondary sanctions) लगाने की अमेरिका की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में एक प्रमुख आर्थिक अधिकारी, स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू के दौरान एक अहम खुलासा किया। अमेरिका ने यूरोपीय देशों से अपील की थी कि वे भी भारत और चीन पर प्रतिबंध लगाने में उसका साथ दें, मगर इन यूरोपीय सहयोगियों ने साफ तौर पर मना कर दिया। नतीजतन, ट्रंप प्रशासन को इन प्रतिबंधों को लागू करने की प्रक्रिया को 60 दिनों के लिए रोकना पड़ा है।
अमेरिकी समाचार नेटवर्क NBC के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में बोलते हुए, बेसेंट ने यूरोपीय देशों के दोहरे रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई।
यूरोप के रुख की आलोचना करते हुए बेसेंट ने कहा, “हमने अपने यूरोपीय सहयोगियों से कहा था कि वे रूस से तेल खरीदने के लिए भारत और चीन पर प्रतिबंध लगाएं, मगर उन्होंने इस विचार को सिरे से खारिज कर दिया। ऐसे में, अमेरिका को अकेले यह बोझ क्यों उठाना चाहिए? राष्ट्रपति ट्रंप यूरोप के साथ बातचीत जारी रखेंगे, मगर अमेरिका अकेले आगे बढ़कर इसके नतीजे नहीं भुगतेगा।” बेसेंट ने यह भी बताया कि यूरोपीय देशों ने खुद मई में रूसी डीजल और जेट ईंधन पर लगे अपने प्रतिबंध हटा लिए थे।
यूक्रेन युद्ध को बढ़ावा देने का आरोप
उन्होंने तीखी आलोचना करते हुए कहा, “यूरोप ने यूक्रेन को जितनी मदद दी है, उससे कहीं ज्यादा पैसा उसने रूस और व्लादिमीर पुतिन को दिया है। आज भी, खुलेआम रूसी ऊर्जा का इस्तेमाल करके वे रूस की युद्ध मशीन को फंड कर रहे हैं। जहां अमेरिका रूस से केवल 4 अरब डॉलर का सामान (जिसमें 1.8 अरब डॉलर के उर्वरक शामिल हैं) आयात करता है, वहीं यूरोप का आयात इससे दस गुना ज्यादा है।”
प्रतिबंधों पर 60 दिनों की रोक; वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ध्यान
अमेरिका ने रूस के खिलाफ उन अतिरिक्त शुल्कों और प्रतिबंधों को 60 दिनों के लिए अस्थायी रूप से रोक दिया है, जिन्हें भारत और अन्य देशों पर लागू किया जाना था। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने स्पष्ट किया कि ‘ग्राहम एक्ट’ राष्ट्रपति को स्थिति का आकलन करने के लिए छूट देने का अधिकार देता है। यह राष्ट्रपति ट्रम्प के एक कार्यकारी आदेश द्वारा दी गई केवल 60 दिनों की अस्थायी राहत है; प्रतिबंधों को स्थायी रूप से नहीं हटाया गया है।
विदेश मंत्री मार्को रुबियो की भारत यात्रा
भारत और उज्बेकिस्तान की छह दिवसीय यात्रा पर रवाना होने से पहले पत्रकारों से बात करते हुए, रुबियो ने कहा, “राष्ट्रपति ने इन प्रतिबंधों और शुल्कों (टैरिफ) का वैश्विक और अमेरिकी अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन करने के लिए यह 60 दिनों का समय दिया है।” उन्होंने बताया कि ईरान से जुड़े तनाव, सऊदी अरब पर हूती हमलों और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पहले से ही दबाव में है।
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ट्रम्प के फैसले पर घरेलू राजनीति में तीखी प्रतिक्रिया
अपने मार-ए-लागो रिसॉर्ट से बोलते हुए, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि यह अमेरिका और दुनिया, दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा। हालांकि, अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों के सांसदों ने इसकी आलोचना की है। भारतीय-अमेरिकी कांग्रेस सदस्य अमी बेरा ने ट्रम्प के फैसले को ऐसा कदम बताया है जिससे पुतिन को राहत मिलती है, जबकि यूक्रेन को मझधार में छोड़ दिया गया है। वहीं, कांग्रेस सदस्य सुहास सुब्रमण्यम ने भी इस नरम रुख पर कड़ी नाराजगी जताई है।



