सोना सस्ता होने के बावजूद खरीदारी से दूर लोग, आखिर क्यों बना ‘वेट एंड वॉच’ का माहौल?

World Gold Council Report 2026: त्योहारों और शादियों के सीजन की शुरुआत के साथ ही आमतौर पर देश भर के सर्राफा बाजारों में खरीदारों का तांता लग जाता है, लेकिन इस बार बाजार का मिजाज पूरी तरह सुस्त नजर आ रहा है। लोग ज्वैलरी शोरूम्स में केवल सोने की ताजा दरों की पूछताछ कर रहे हैं और बिना खरीदारी किए खाली हाथ लौट रहे हैं।
अगस्त के अंत में त्योहारी सीजन से ठीक पहले सोने की मांग में अचानक तेज उछाल देखने को मिला था, जिससे व्यापारियों को बंपर कारोबार की उम्मीद जगी थी। हालांकि, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की नई रिपोर्ट बताती है कि पिछले कुछ हफ्तों में सोने की खुदरा मांग में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
कीमतों के भारी उतार-चढ़ाव से ग्राहक ‘वेट एंड वॉच’ मोड में
मांग में इस अचानक गिरावट की मुख्य वजह सोने के भाव में आ रहा बेतहाशा उतार-चढ़ाव है। कभी दाम रिकॉर्ड स्तर को छू रहे हैं, तो कभी तेजी से लुढ़क जा रहे हैं। इस अनिश्चितता ने आम खरीदारों को असमंजस में डाल दिया है, जिससे ज्यादातर ग्राहकों ने गैर-जरूरी खरीदारी को टालते हुए ‘इंतजार करो और देखो’ (Wait-and-Watch) की नीति अपना ली है।
इस सुस्ती का सीधा असर रिटेलर्स और बड़े शोरूम्स पर पड़ा है। नुकसान के जोखिम से बचने के लिए दुकानदारों ने नया भारी स्टॉक मंगाना रोक दिया है और वे केवल पक्के ऑर्डर्स के मुताबिक ही इन्वेंट्री रख रहे हैं।
शादियों में भारी गहनों की जगह ले रही लाइटवेट ज्वैलरी, डिजिटल गोल्ड का बढ़ा क्रेज
जिन परिवारों में शादी तय है, वे मजबूरी में खरीदारी तो कर रहे हैं, मगर उनके खरीदारी के तरीके में बड़ा ट्रेंड बदलाव आया है। बजट बिगड़ने के डर से लोग पारंपरिक भारी गहनों के बजाय आधुनिक और हल्के वजन (Lightweight) वाले आभूषणों को प्राथमिकता दे रहे हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए बड़े ज्वैलरी ब्रांड्स नए डिजाइन्स, आक्रामक डिस्काउंट और प्रमोशनल ऑफर्स का सहारा ले रहे हैं।
इसके साथ ही, शुद्ध निवेश के लिहाज से सोने की खरीदारी करने वाले अब फिजिकल सोना घर या लॉकर में रखने के बजाय डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जैसे विकल्पों को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मान रहे हैं।
इंपोर्ट लागत से $78 सस्ता होने के बाद भी फीका कारोबार
चौंकाने वाली बात यह है कि भारतीय घरेलू बाजार में सोना अपनी वास्तविक आयात लागत (इंपोर्ट पैरिटी) से काफी कम कीमत पर बिक रहा है। अंतरराष्ट्रीय दरों के मुकाबले भारत में सोना डिस्काउंट पर मिल रहा है। जुलाई में यह डिस्काउंट करीब $34 प्रति औंस था, जो अगस्त में बढ़कर $51 और 11 सितंबर तक रिकॉर्ड $78 प्रति औंस पर पहुंच गया। इसका मतलब है कि भारत में सोना अंतरराष्ट्रीय लागत से करीब 2% सस्ता मिल रहा है, फिर भी ग्राहक बाजार से दूरी बनाए हुए हैं।
पुराना सोना एक्सचेंज और अनौपचारिक सप्लाई बनी बड़ा कारण
सोने की आयात लागत ज्यादा होने के बावजूद घरेलू बाजार में इसके सस्ता बिकने के पीछे मुख्य रूप से पुराना सोना जिम्मेदार है। बढ़े हुए भाव का लाभ उठाने के लिए आम लोग नए गहने खरीदने के लिए भारी मात्रा में पुराना सोना एक्सचेंज कर रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजार में सोने की लिक्विडिटी और सप्लाई बढ़ गई है। इसके अतिरिक्त, वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट इस बात की ओर भी इशारा करती है कि अनौपचारिक सप्लाई, खासकर अवैध और तस्करी के सोने की आमद, इस बड़े घरेलू डिस्काउंट की एक प्रमुख वजह है।
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भारत के गोल्ड इंपोर्ट में 58% की भारी गिरावट
खुदरा मांग में आई इस ऐतिहासिक सुस्ती का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ा है। अगस्त महीने में भारत का कुल सोना आयात घटकर महज 2.3 अरब डॉलर रह गया। यह आंकड़ा पिछले महीने की तुलना में 45% कम है, जबकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इसमें 58% की भारी गिरावट आई है। अगस्त में सिर्फ 15 से 20 टन सोने का आयात हुआ। भारत के कुल आयात बास्केट में सोने की हिस्सेदारी, जो पिछले साल 9% पर थी, वह अब सिमटकर महज 3% रह गई है।


