उर्वरक विक्रेताओं व समिति सचिवों को दिया प्रशिक्षण, पराली न जलाने की दिलाई शपथ

गाजियाबाद। फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल (FFS) के अंतर्गत जनपद गाजियाबाद के उर्वरक सहकारी समितियों, थोक एवं फुटकर उर्वरक विक्रेताओं तथा समिति सचिवों का प्रथम स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम उप कृषि निदेशक की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण एवं बिक्री व्यवस्था को पारदर्शी और सुचारु बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया।

जिला कृषि अधिकारी अमित कुमार ने उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार ऑनलाइन खाद की बुकिंग कर समय से उर्वरक प्राप्त करने की व्यवस्था की जानकारी देने के निर्देश दिए। खाद विक्रेताओं एवं समिति सचिवों से कहा गया कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर आने वाले किसानों को ऑनलाइन बुकिंग प्रक्रिया की जानकारी उपलब्ध कराएं।

ऑनलाइन बुकिंग एवं पोर्टल प्रबंधन की विस्तृत जानकारी डॉ. शताक्षी, वरिष्ठ प्राविधिक सहायक, वर्ग-1 द्वारा दी गई।

पराली न जलाने की दिलाई शपथ

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान उपस्थित खाद विक्रेताओं एवं समिति सचिवों को पराली एवं फसल अवशेष न जलाने के संबंध में जागरूक किया गया तथा सभी को पराली प्रबंधन की शपथ दिलाई गई। अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति प्रभावित होती है और मानव, पशु एवं वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

उप कृषि निदेशक ने कहा कि पराली का समाधान उसे जलाना नहीं, बल्कि उसका उचित प्रबंधन और उपयोग करना है। फसल अवशेषों का मल्चर, हैप्पी सीडर आदि कृषि यंत्रों के माध्यम से खेत में प्रबंधन किया जा सकता है। इसके अलावा पराली से कम्पोस्ट, पशु आहार तथा बायोगैस/बायो-सीएनजी के उत्पादन में भी उपयोग किया जा सकता है।

खाद-बीज दुकानों पर बैनर लगाना अनिवार्य

उप कृषि निदेशक ने जनपद के सभी खाद, बीज एवं कीटनाशी लाइसेंस धारकों को निर्देश दिए कि वे अपने प्रतिष्ठानों पर पराली प्रबंधन एवं किसानों को जागरूक करने संबंधी बैनर/पोस्टर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। साथ ही प्रतिष्ठान पर आने वाले किसानों को पराली न जलाने तथा फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित किया जाए।

अधिकारियों ने बताया कि पराली जलाना दंडनीय अपराध है। निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के अनुसार दो एकड़ से कम क्षेत्र में ₹5,000, दो से पांच एकड़ तक ₹10,000 तथा पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में ₹30,000 की क्षतिपूर्ति का प्रावधान है। अपराध की पुनरावृत्ति होने पर नियमानुसार कार्रवाई एवं अर्थदंड भी लगाया जा सकता है।

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